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जिला अस्पताल में नहीं सी-आर्म मशीन, मरीजों को करना पड़ता है रेफर

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प्रदीप शर्मा
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नारनौल। पेप्सू (पटियाला और पूर्वी पंजाब राज्य संघ) के समय बने जिला अस्पताल में सी-आर्म इमेज इंटेंसिफायर मशीन नहीं है। यह मशीन हड्डी जोड़ने के लिए इस्तेमाल की जाती है। महेंद्रगढ़ एवं नारनौल नागरिक अस्पताल में एक-एक हड्डी रोग विशेषज्ञ हैं। जिनको सरकार प्रतिमाह लगभग 1.70 लाख रुपये वेतन दे रही है, लेकिन उपकरण के अभाव में 13 लाख आबादी वाले जिले के मरीजों को इन चिकित्सकों का लाभ नहीं मिल रहा। हड्डी रोग से ग्रस्त या फिर दुर्घटना के सभी केस रेफर किए जाते हैं। कई मरीजों को रॉड आदि डलवाने के लिए निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है जहां पर एक ऑपरेशन के 25 से 30 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। 15 लाख रुपये की मशीन के पीछे जिले के मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
जिले के सिविल अस्पताल में वैसे ही चिकित्सक आने को तैयार नहीं रहते। अगर स्पेशलिस्ट चिकित्सक यहां आ भी जाएं तो मात्र ओपीडी तक सिमट कर रह जाते हैं। इसका मुख्य कारण है कि अस्पताल में मशीनरी नहीं है। ऐसे में ये चिकित्सक लोगों का संपूर्ण रूप से इलाज कैसे कर पाएंगे। मजबूरन इन चिकित्सकों को गंभीर मरीजों को रोहतक या जयपुर रेफर करना पड़ता है। संवाद
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जिले में दो सी-आर्म इमेज इंटेंसिफायर मशीन की जरूरत
जिले में महेंद्रगढ़ एवं नारनौल दो नागरिक अस्पताल हैं। दोनों ही अस्पतालों से छह लाख से अधिक लोग जुड़े हुए हैं। इस वजह से दोनों ही स्थानों पर एक-एक सी-आर्म मशीन की आवश्यकता है। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित एवं डॉ. होशियार सिंह ने बताया कि सिविल अस्पताल की सबसे बड़ी जरूरत सी-आर्म इमेज इंटेंसिफायर मशीन की है। इसके अलावा एक फ्रेक्चर टेबल की जरूरत है। ये दोनों उपलब्ध हो जाएं तो मरीजों को रेफर नहीं करना पड़ेगा। मरीज को यहीं पर सस्ता इलाज मिल पाएगा।
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घायलों को करना पड़ता है रेफर
जिले में आए दिन कोई न कोई सड़क हादसे में या फिर गिर कर हड्डी टूट जाने वाले मरीजों को सिविल अस्पताल में लाया जाता है। अधिक टूटफूट होने के कारण कई बार ठीक से मरीज की हड्डियों की जांच नहीं हो पाती। सुविधाओं के अभाव में मरीज को पीजीआई के लिए रेफर करना पड़ता है।
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प्रतिदिन हो रही हैं 250 ओपीडी
जिले में प्रतिदिन हड्डी के मरीजों की 250 ओपीडी हो रही है। नारनौल में 150 तथा महेंद्रगढ़ 100 मरीज प्रतिदिन आ रहे हैं। वहीं महेंद्रगढ़ में लगभग 50 तथा नारनौल में 30 गंभीर मरीज आते हैं। ऐसे में उनको हायर सेंटर के लिए रेफर करना पड़ता है। चिकित्सक मरीज को उपलब्ध संसाधनों से बेहतर से बेहतर इलाज करने का प्रयास करते हैं, लेकिन कई बार मशीनों के अभाव में बीमारी ठीक से पकड़ में नहीं आती इस कारण से इस गंभीर बीमारी के मरीजों को रोहतक या अन्य किसी और शहर के लिए रेफर करना पड़ता है।
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रॉड डालने के काम आती है सी-आर्म मशीन
डॉ. अमित शर्मा ने बताया कि सी-आर्म मशीन हड्डी से जुड़े ऑपरेशन के काम में आती है। ये मशीन 15 से 20 लाख रुपये की आती है। इस मशीन के जरिये डॉक्टर ऑपरेशन के दौरान हड्डी या अंदर की जगह को स्क्रीन पर देख पाते हैं। इसके जरिये माइनर से लेकर बड़ा ऑपरेशन किया जा सकता है। इसके अलावा रॉड डालने तथा जोड़ों के पास टूटी हड्डी को जोड़ने के काम आती है। इससे यह पता चल जाता है कि कौन सा स्क्रू, रॉड, कहां डालनी है। इस मशीन के बिना ऑपरेशन करना असंभव होता है।
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वर्जन
सी-आर्म मशीन के बारे में उच्च अधिकारियों को दो-तीन बार लिखा जा चुका है। जल्द ही सी-आर्म मशीन आने की संभावना है। पहली बार ही यह मशीन आएगी।
- डॉ. अशोक कुमार, सिविल सर्जन, नारनौल।
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वर्जन
जब मैं स्वास्थ्य मंत्री था तो उस समय इस प्रकार की कभी कोई मांग नहीं आई थी। स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं को लेकर मैं अधिकारियों से भी बातचीत करता रहता था, उन्होंने भी कभी ऐसा जिक्र नहीं किया। मेरे सामने समय से पहले जन्म होने वाले बच्चों को मशीनों में रखने की मांग आई थी, उसका हमने अलग से वार्ड बनाया था। - राव नरेंद्र सिंह, पूर्व स्वास्थ्यमंत्री
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वर्जन
प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में काफी गंभीर है। भाजपा शासन काल में जिले में स्वास्थ्य सेवाएं पहले से बेहतर हुई हैं। मेडिकल कॉलेज तथा ट्रामा सेंटर पर काम चल रहा है। चिकित्सकों की संख्या पहले से अच्छी हुई है। सी-आर्म मशीन की समस्या स्वास्थ्य मंत्री को अवगत करवाएंगे, निश्चित रूप से जल्द ही जिले में एक सी-आर्म मशीन होगी।
- ओमप्रकाश यादव, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री।
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