गांव मुसनोता में लगी स्वतंत्रता सेनानी की मूर्ति।
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स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय चंद्रा राम सैन देश के लिए बलिदान देकर ब्लॉक निजामपुर के गांव मूसनोता का नाम रोशन किया है। चंद्रा राम सैन 19 वर्ष की आयु में भारतीय सेना की राजपूत रेजीमेंट में भर्ती हुए। सर्विस के दौरान उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध लड़ा। बाद में नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित आजाद हिंद फौज के गर्म दल में शामिल हो गए।
इस दौरान सेनानी चंद्रा राम सैन को अंग्रेजों ने कठोर कारावास की सजा दी और उनको अंडमान निकोबार जेल में डाल दिया। स्वतंत्रता सेनानी ने इस दौरान अपने जीवन के आठ वर्ष गुजारे। देश आजाद होने के बाद केंद्र सरकार ने सभी भारतीयों को वहां से निकाला। 1972 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने स्वतंत्रता सेनानी को सम्मानित किया। उसके बाद हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री चौ. बंशीलाल ने ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया। वही 14 जनवरी 1987 को 76 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वहीं अब स्वतंत्रता सेनानी का परिवार सरकार की अनदेखी से परेशान है। सेनानी के पौत्र नवीन सैन ने बताया कि सरकार इनके बलिदान को भूले बैठी है व स्वतंत्रता सैनानी व उनके परिजनों की अनदेखी कर रही है।