महेंद्रगढ़। आदर्श रेलवे स्टेशन महेंद्रगढ़ पर सुपरफास्ट ट्रेनों का ठहराव न होने से क्षेत्रवासियों में रेल मंत्रालय के खिलाफ भारी रोष है। बार-बार ज्ञापन दिए जाने एवं धरना प्रदर्शन के बाद भी मंत्रालय इस सैनिक बाहुल्य क्षेत्र की सुनवाई नहीं कर रहा। सांसद का डीओ लेटर का भी रेलवे बोर्ड कोई महत्व नहीं समझ रहा।
दैनिक रेल यात्री महासंघ के अध्यक्ष रामनिवास पाटोदा ने बताया कि महेंद्रगढ़ जिला सैनिक बाहुल्य क्षेत्र है। क्षेत्र से हजारों सैनिक देश सेवा में बॉर्डर पर तैनात हैं। छुट्टी मिलने पर जब वे घर आते हैं तो गाड़ियां न रुकने की वजह से उन्हें पूरी रात रेवाड़ी जंक्शन पर काटनी पड़ती है। जिले में प्रदेश का एक मात्र केंद्रीय विश्वविद्यालय है, जहां देश एवं विदेश से विद्यार्थी पढ़ने आते हैं। लेकिन सुपर फास्ट ट्रेन न रुकने से विद्यार्थियों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। इसके अलावा व्यापारियों को भी काफी दिक्कतें आती हैं। सियालदाह-बीकानेर एक्सप्रेस, हावड़ा-बाड़मेर व जोधपुर-दिल्ली रेल गाड़ियों का जयपुर जोन व बीकानेर मंडल ने लोहारू रेलवे स्टेशन पर ठहराव किया गया है, लेकिन इन गाड़ियों का रेलवे के उच्च अधिकारियों ने महेंद्रगढ़ में ठहराव नहीं किया। राजस्थान में इन गाड़ियों का ठहराव छोटे-छोटे रेलवे स्टेशन पर किया गया है। जबकि महेंद्रगढ़ स्टेशन की आमदनी और यात्री उपरोक्त छोटे-छोटे स्टेशनों से अधिक है।
ये मांगें भी रखीं:
-जयपुर से लोहारू तक चलने वाली सभी गाड़ियों का विस्तार पहले की भांति रेवाड़ी जंक्शन तक
- टीसी की पोस्ट को महेंद्रगढ़ स्टेशन पर सृजित की जाए।
- रेलवे स्टेशन पर कोच इंडेक्स बोर्ड लगाई जाएं।
- प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर टीन शेड लगाई जाए।
- प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर लगी टीन के अंदर बारिश में पानी आता है उसकी रिपेयर की जाए और बढ़ाकर डबल किया जाए।
- दिव्यांग के लिए रैंप की सुविधा की जाए।
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एक महीने में मांग पूरी नहीं हुई तो करेंगे धरना प्रदर्शन
पाटोदा ने बताया कि इसी माह में पांच नई रेल गाड़ियों का विस्तार हुआ है जयपुर से नई इंटरसिटी सादलपुर तक, मुंबई से हिसार, जयपुर से गंगानगर, बीकानेर से हरिद्वार व जोधपुर से ऋषिकेश जो वाया सादलपुर होकर किया गया है, महेंद्रगढ़ स्टेशन को इन ट्रेनों से वंचित रखा गया है। अध्यक्ष ने सरकार से मांग की है कि अगर एक माह में रेलवे संबंधित समस्याओं का समाधान नहीं किया तो क्षेत्र के लोग धरना प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे जिसका जिम्मेदार रेल प्रशासन होगा।