शिक्षा निदेशालय ने शिक्षा अधिनियम 134ए के तहत दाखिला की अंतिम एक बार फिर बढ़ा दी है, क्योंकि अभी तक सभी पात्र विद्यार्थियों को दाखिला नहीं मिल पाया है। अब यह तारीख 7 जनवरी कर दी गई है। शिक्षा विभाग केवल तारीख पर तारीख बढ़ाए जा रहा है, लेकिन निजी स्कूल संचालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। जिले में 204 के करीब ऐसेे विद्यार्थी हैं, जिन्हें अभी तक दाखिला नहीं मिल पाया है। इसके पीछे जिले के तीन निजी स्कूल संचालकों द्वारा इन विद्यार्थियों का दाखिला न देना है। हालांकि दाखिला नहीं देने पर जिला शिक्षा विभाग इन स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई के लिए निदेशालय को पत्र लिखा है, मगर अभी तक निदेशालय की तरफ विभागीय अधिकारियों के पास कार्रवाई संबंधित कोई आदेश नहीं आया है। ऐसे में पुराने स्कूल नाम कटवा चुके विद्यार्थियों के भविष्य पर अंधकार के बादल मंडराने लगे हैं।
बता दें कि अधिनियम 134ए के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के मेधावी विद्यार्थियों को अपनी पसंद के निजी स्कूलों में निशुल्क पढ़ाया जाता है। इसके लिए विद्यार्थियों को विभाग द्वारा आयोजित परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है। इसके बाद मेरिट सूची के आधार पर विद्यार्थियों को उनके पसंद के स्कूल में दाखिला लिया जाता है। मगर जिले के तीन स्कूूलों ने ऐसे विद्यार्थियों को अपने स्कूलों में दाखिला देने से मना कर दिया है। उक्त निजी स्कूलों का तर्क है सरकार ने उन्हें पिछले तीन-चार के दौरान नियम के तहत पढ़ने वाले बच्चों के पैसे नहीं दिए है। ऐसे में वे इन बच्चों को अपने स्कूलों में दाखिला देने में असमर्थ है। इस जिले में 204 विद्यार्थियों को अभी तक दाखिला नहीं मिल पाया है। जिले में शिक्षा अधिनियम 134ए के तहत 1113 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी, जिसमें सभी ने परीक्षा उत्तीर्ण की है। इसके अलावा दूसरे जिले के 101 बच्चों को उनकी पसंद अनुसार यहां स्कूल अलॉट किए गए हैं। इसके लिए दाखिले की अंतिम तिथि 31 दिसंबर निर्धारित की गई थी। मगर पूरे प्रदेश में ही अनेक विद्यार्थियों को निजी स्कूूलों द्वारा दाखिला नहीं दिए जाने की स्थिति में शिक्षा निदेशालय ने दाखिले की अंतिम तिथि 7 जनवरी तक बढ़ा दी है।
नियम 134ए के तहत उत्तीर्ण विद्यार्थियों में से अधिकतर विद्यार्थियों को दाखिला मिल चुका है। एक निजी स्कूल द्वारा दाखिला नहीं दिया जा रहा है। इसको लेकर विभागीय अधिकारियों को लिखा गया है। सुनील दत्त यादव, जिला शिक्षा अधिकारी नारनौल।