गांव जलालुद्दीन माजरा में सिद्ध बाबा बालक दास की समाधि पर लगा वार्षिक मेला शनिवार को धूमधाम से संपन्न हो गया। बूंदाबांदी के बीच दिनभर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी रही। यह मेला भाद्रपद में शुक्ल पक्ष की पंचमी को लगता है। मेले में विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया। मान्यता है कि काफी साल पहले गांव जलालुद्दीन माजरा में एक महिला ने एक बच्चे व एक सांप को जन्म दिया था।
बच्चे के जन्म के बाद जब महिला का भाई अपनी बहन के पास शगुन के तौर पर सामान लेकर आया तो उस समय महिला अपने घर से बाहर गई हुई थी। भाई ने देखा कि उसके भांजे के साथ एक सांप भी पड़ा है तब उसे लगा कहीं सांप उसके भांजे को डस न लें इसलिए उस सांप को मार दिया था। सांप की मौत होते ही बच्चे के भी मौत हो गई थी। महिला के घर पहुंचने पर जब उसने देखा की सांप व बच्चा दोनों की मौत हो गई तो महिला की भी सदमे से मौत हो गई थी। तब परिवार के सदस्यों ने महिला, सांप व बच्चे को देवता का रूप मानते हुए दोनों की खेतों में ही समाधियां बनवा दी थीं। तभी यह मेले का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें दूर दराज से श्रद्धालु समाधियों पर माथा टेकने आते हैं। मेला प्रबंधक कमेटी के प्रधान रामकुमार का कहना है कि सिद्ध बाबा बालक दास की समाधि पर माथा टेकने से हर मनोकामना पूर्ण होती है। समाधि पर दूध व मखनी चढ़ाने से पशुओं के दूध में वृद्धि होती है। इस मौके पर गुरनाम सिंह, ईशम सिंह, मदन लाल, अभय राम, अमृत लाल, रमेश कुमार, गुरदयाल सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।