Sathi paddy cultivation made a profitable deal
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कुरुक्षेत्र। लुप्तप्राय हो रहे साठी धान की खेती करके किशनपुरा (यमुनानगर) का किसान रमेश वालिया अच्छा मुनाफा कमा रहा है। खास बात यह है कि इसकी खेती देसी तरीके से की जा रही है। इसके साथ-साथ वह जैविक जौ, जैविक कांगनी, जैविक अलसी, जैविक मंडवा (रागी), जैविक मक्का, जैविक बासमती चावल की खेती भी कर रहा है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित कृषि कार्यशाला में आए प्रदेशभर से आए किसान आर्य वैदिक कृषि फार्म की ओर लगे स्टॉल पर साठी चावल को देखकर दंग रह गए।
किसान रमेश वालिया ने बताया कि सृष्टि चक्र को बनाए रखने के लिए उन्होंने देसी तरीके से खेती करने का निर्णय लिया था। शुरुआती दौर में देसी तरीके से खेती करने पर काफी नुकसान झेलना पड़ा था। इस नुकसान के कारण उनके गांव के लोग, दोस्त और रिश्तेदार उनका मजाक उड़ाते थे। यहां तक कि घर के लोगों ने भी उनसे मुंह फेर लिया था, मगर उनका हौसला कम नहीं हुआ।
उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से परामर्श लेना शुरू किया, जिससे उनको खेती के बारे कुछ हद तक जानकारी प्राप्त हुई। उसके बाद सोशल मीडिया, सेमिनार और पहले से खेती कर रहे किसानों से संपर्क करके देसी तरीके से खेती शुरू कर दी। आखिरकार 14 साल की कड़ी मेहनत के बाद वर्ष 2016 में उनको मुनाफा हुआ।
बताया कि यूपी बॉर्डर के नजदीक उनके पास साढ़े सात एकड़ जमीन है। इस जमीन पर वह जैविक खेती करने के साथ साठी धान की खेती कर रहे हैं। उनके फार्म से मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र तथा आसपास क्षेत्र के किसान जुड़े हैं। वे उन किसानों को खेती करने की जानकारी के साथ साठी चावल और उसकी पौध बेच रहे हैं। इससे उनको अच्छा खासा मुनाफा हो रहा है।
वात नाशक है साठी चावल
किसान रमेश वालिया ने बताया कि साठी चावल वात नाशक है। इसमें कैल्शियम और फास्फोरस काफी मात्रा में पाया जाता है। इसे खाने से हड्डियां मजबूत होती है तथा जोड़ों का दर्द नहीं होता है। लोग इस चावल को अधिकतम खिचड़ी और खीर बनाकर खाते हैं।