फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कालेश्वर तीर्थ का जीर्णोद्धार अधूरा

विज्ञापन
अधर में लटका कालेश्वर तीर्थ का जीर्णोद्धार कार्य। संवाद - फोटो : Kurukshetra
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र 48 कोस में शामिल कालेश्वर तीर्थ बदहाली का शिकार है। राज्य सरकार की ओर से जारी 63 लाख रुपये के बजट से भी इस ऐतिहासिक तीर्थ का जीर्णोद्धार नहीं हो सका। इस तीर्थ के जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण का कार्य पिछले दो साल से अधर में लटका हुआ है। काम शुरू करवाने के लिए ब्राह्मण उद्धार सभा कई बार कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड को कई बार गुहार लगा कर चुकी है। इसके बावजूद केडीबी की ओर से तीर्थ के जीर्णोद्धार का कार्य आरंभ नहीं कराया गया।
उल्लेखनीय है कि कालेश्वर तीर्थ कुरुक्षेत्र 48 कोस का ऐतिहासिक स्थल है। गत वर्ष ही इस तीर्थ को कुरुक्षेत्र 48 कोस के तीर्थों में शामिल किया गया है। इस तीर्थ के किनारे भगवान शिव का प्राचीन मंदिर स्थित है। यहां रावण ने भगवान शिव से काल पर विजय प्राप्त करने का आशीर्वाद मांगा था। इस मंदिर में महाशिवरात्रि पर विशाल मेला लगता है।
विज्ञापन

तीर्थ के जीर्णोद्धार का कार्य वर्ष 2020 में आरंभ हुआ था। इस दौरान घाट की चाहरदीवारी करने के साथ बुर्जियां की मरम्मत की गई थी। कोरोना महामारी आने के बाद से जीर्णोद्धार का कार्य ठप हो गया। दो साल से ज्यादा वक्त बीतने के बाद भी काम दुबारा शुरू नहीं हो पाया। इस जीर्णोद्धार की वजह से तीर्थ की प्राचीनता भी नष्ट हो गई।
दो साल पहले जो कार्य हुए थे, वह भी अपना वजूद खोने लगे हैं। घाट पर चारों तरफ गंदगी फैली हुई है। घाट में घास, खरपतवार ने डेरा जमा लिया है। घाट को खेल मैदान बना दिया गया। घाट पर मिट्टी के ढेर लगे हुए हैं, जो बारिश आने पर पानी के साथ बहकर घाट में जमा हो रही है। घाट के साथ लगती जमीन में गंदा पानी जमा हो रहा है।
तीर्थ के जीर्णोद्धार का कार्य बंद होने से तालाब में गंदा पानी छोड़ा जा रहा है। आसपास के लोगों का कहना है कि पिछले दिनों मोटर लगाकर गांव बाहरी का गंदा पानी तालाब में डाला गया, जिससे आसपास का वातावरण प्रदूषित हो गया। अब भी गांव से लगातार गंदा पानी तालाब में छोड़ा जा रहा है। इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो गंदा पानी घाट तक पहुंच जाएगा।
तीर्थ की दीवार तथा तल पर लाल पत्थर लगना है। इसके अलावा तीर्थ पर आकर्षक लाइट भी लगाई जाएगी। लाल पत्थर तीर्थ पहुंच गया है, देखरेख के अभाव में पत्थर जर्जर और टूट रहे हैं। पत्थर खुले में ही रखा गया है, जिससे चोरी का खतरा भी है।
मंदिर के पुजारी सदानंद मिश्रा ने बताया कि छह महीने पहले निर्माण एजेंसी यहां पत्थर पहुंचाया गया। तीर्थ बदहाली का शिकार है। यहां कार्तिक मास स्नान का महत्व है। दूरदराज से श्रद्धालु स्नान करने पहुंचते हैं। व्यवस्था न होने के कारण उन्हें निराश लौटना पड़ रहा है।
विज्ञापन

केडीबी के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने बताया कि तीर्थ के जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण का कार्य पीडब्ल्यूडी को सौंपा गया है। विभाग के अधिकारियों ने बातचीत में बताया कि ठेका लेने वाली एजेंसी से ही कार्य कराया जाएगा। शीघ्र ही कार्य का आरंभ होगा।

कालेश्वर तीर्थ पर निर्माण एजेंसी की ओर से लाए गए पत्थर। संवाद- फोटो : Kurukshetra

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें