डेरा मुखी राम रहीम को शक था कि साध्वियों द्वारा लिखा गया पत्र रणजीत ने अपनी बहन से लिखवाया था और इसलिए रणजीत सिंह की हत्या करने की योजना बनाई गई थी। यह बात भी सामने आई थी कि दुष्कर्म की घटना के बाद रणजीत ने डेरा छोड़ दिया था और उस पर दोबारा से डेरे का मैनेजर बनने का दबाव डाला जा रहा था। जब रणजीत सिंह नहीं माना तो गांव के पास ही उसकी हत्या कर दी गई थी।
2007 में आरोपियों पर सीबीआई अदालत ने आरोप तय किए थे और अदालत में नियमित सुनवाई हो रही थी। सीबीआई अदालत तक ले जाने वाले रणजीत सिंह के पिता जोगिंदर सिंह ने उम्र के आखिरी पड़ाव तक संघर्ष किया। 80 साल की उम्र में वर्ष 2016 में उनका देहांत हो गया। वहीं दो साल बाद 70 साल की उम्र में माता कला देवी भी दुनिया में नहीं रहीं।
यह भी पढ़ें: पंजाब की सियासत : अगला हफ्ता बेहद अहम, नई पार्टी का एलान कर सकते हैं अमरिंदर, कांग्रेस चौकस
फांसी की सजा दी जाए वो भी कम है: जगसीर
रणजीत के पुत्र ने फोन पर बातचीत के दौरान बताया कि आज इंसाफ मिला है। पिता के हत्यारे राम रहीम सहित पांच को दोषी करार दिया गया है। 12 को सजा सुनाई जाएगी। इस अपराध के लिए राम रहीम को फांसी की सजा भी दी जाए वो भी कम है। दादा-दादी आज जिंदा होते तो पुत्र को मिले इंसाफ के लिए बहुत खुश होते। आज भगवान ने सिद्ध कर दिया कि उसके घर देर है अंधेर नहीं। आखिर 19 साल बाद सच की जीत हुई।
घर पर कड़ी सुरक्षा, अंजान का प्रवेश निषेध
अदालत के फैसले से पहले ही परिवार को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है। रणजीत के खानपुर कोलियां स्थित निवास पर सुरक्षा के कड़े प्रबंध हैं। किसी भी अनजान व्यक्ति का घर में प्रवेश निषेध है। फिलहाल परिवार कहां है यह किसी को भी मालूम नहीं है। बताया जा रहा है कि परिवार को 12 तारीख तक कड़ी सुरक्षा के बीच रखा जाएगा।