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बारिश थमी, धुंध गायब, शीतलहर बरकरार

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बारिश थमने के बाद सोमवार को ब्रह्मसरोवर पर घूमते पर्यटक। संवाद - फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। तीन दिन बाद सोमवार को लोगों को बारिश से राहत मिली। दोपहर 12 बजे सूर्यदेव ने दर्शन दिए, मगर कुछ देर के बाद ही बादलों में ओझल हो गए। दिनभर बादल छाए रहने और ठंड के कारण लोग घरों में दुबकने को मजबूर रहे। हालांकि धुंध से लोगों को निजात मिली, लेकिन शीतलहर बरकरार रही। बारिश थमने पर ब्रह्मसरोवर पर पर्यटक भी दिखाई दिए।
वहीं बारिश रुकने के बाद किसान खेत में खड़ी फसल के नुकसान का आंकलन करने में लगे हुए हैं। बारिश से खेतों में खड़ी गेहूं की फसल का पौधा पीला पड़ चुका है। वहीं आलू, मटर व टमाटर की फसल पर भी खराब प्रभाव पड़ा है। आलू, मटर और टमाटर की जड़े गलने लगी हैं। गांव पाडलू के किसान सुखचैन सिंह ने कहा कि ज्यादा बारिश के कारण आलू की फसल सबसे अधिक प्रभावित हुई है। वहीं सूरजमुखी का बीज उपलब्ध नहीं है, जबकि फसल लगाने का समय निकट आ चुका है।
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जसविंद्र सिंह, रविंद्र सिंह, कुलदीप सिंह व मलकीत सिंह का कहना है कि आलू की फसल पूरी खराब हो चुकी है। वहीं मटर 80 फीसदी खराब हुई है। फसलों में भरे पानी को ट्यूबवेल लगाकर निकालना पड़ेगा, जिसमें चार से पांच दिन लगेंगे। जिन किसानों के खेत गहराई में है, उनमें से पानी नहीं निकाला जा सकता। उनकी सौ फीसदी फसल खराब होने की संभावना है।
सब्जी विशेषज्ञ डॉ. सीबी सिंह ने बताया कि धूप निकलने से किसानों को थोड़ी राहत मिलेगी, लेकिन सिर्फ धूप निकलने के भरोसे न बैठें। फसलों में भरे पानी को निकालने की व्यवस्था करें। लगातार तीन दिनों की बारिश के कारण मिट्टी नीचे तक गीली हो चुकी है, इसलिए फसल का पानी जल्दी नहीं सूख पाएगा। बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी होने के बाद पश्चिमी विक्षोभ बनता है। इससे बादल बन जाते हैं और हवा चलने लगती है, जिस वजह से तापमान में गिरावट होती है।
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धूप निकली तो नुकसान में होगी कटौती: गुरप्रीत सिंह
हसनपुर के रहने वाले किसान गुरप्रीत सिंह का कहना है कि अब कई दिनों तक अच्छी धूप निकले तो उनके नुकसान में कटौती हो सकती है। फसल में खड़े पानी को मौसम खुलने के बाद ही निकाला जा सकता है। हालांकि अभी खेत की मिट्टी गीली ही है, जिससे आलू, मटर और टमाटर की फसल को नुकसान होगा।
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