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पहाड़ी क्षेत्रों में नहीं थम रही बारिश, हालात ऐसे रहे तो हर बार की तरह फिर कई गांव व डेरों में घुसेगा मारकंडा नदी का पानी, हजारो

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पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश थमने का नाम नहीं ले रही, जिससे की मारकंडा नदी का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ने लगा है। फिलहाल नदी में 3100 क्यूसेक पानी बह रहा है, लेकिन बारिश की सिलसिला नहीं थमा तो हर बार की तरह इस बार भी गांव, डेरों व खेतों में नदी का पानी घुस सकता है। यही कारण है कि नदी किनारे बसी बस्तियों के लोग एकबार फिर सहमे हुए हैं और बचाव के लिए हवन-यज्ञ भी कर रहे हैं।
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मारकंडा नदी के उफान से हर साल एक दर्जन से अधिक गांवों में तबाही आती है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन और सरकार की ओर से समस्या के स्थायी समाधान का प्रयास नहीं किया जा रहा है। अब एकबार फिर पहाड़ों में बारिश से खतरा बढ़ने लगा है। विदित हो कि पिछले अगस्त माह में भी नदी उफान पर थी और अपने तांडव से गांव नैसी, जलबहेडा, टबरा, मडाडो, जैतपुरा, शेरगढ़, जंधेडी, बालापुर, दानीपुर व जखवाला सहित अनेकों गांवों की हजारों एकड़ धान की फसल को जलमग्न कर आसपास के डेरा वासियों को भी काफी नुकसान पहुंचाया था। आशंका जताई जा रही है कि पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश नहीं थमी तो कुछ ही दिनों में नदी खतरे के निशान से ऊपर बहने लगेगी। नदी के पास लगते खेतों के किसानों का कहना कि प्रशासन को समय रहते एहतियाती कदम उठाना चाहिए। हर साल नदी में उफान आता है, लेकिन विभाग कभी पहले से तैयारी करके नहीं रखता, जिससे कई गांव वे डेरे के लोगों को नुकसान उठाना पड़ता है।
समय रहते प्रशासन को तैयारी पूरी करनी चाहिए: बलदेव
गांव जलबेहडा के किसान बलदेव शर्मा ने कहा कि मारकंडा नदी में आया उफान किसानों की फसल को पहले भी बहुत नुकसान पहुंचा चुका है, लेकिन प्रशासन समय रहते मारकंडा नदी की सफाई नहीं कराता, जिससे पानी ओवर फ्लो होकर खेतों में घुस जाता है और काफी नुकसान पहुंचाता है। मारकंडा नदी को शांत रखने के लिए गांव में हवन यज्ञ व भंडारे किए जा रहे हैं। प्रशासन को भी समय रहते अपनी तैयारी पूरी करनी चाहिए।
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कमजोर तटबंधों को किया जाना चाहिए पक्का: गौरव
गांव जंधेडी के किसान गौरव ने कहा कि मारकंडा नदी का उफान किसानों को काफी नुकसान पहुंचाता है। इस समय किसानों ने काफी रुपये खर्च कर धान की फसल को तैयार करने में लगे हुए हैं। ऐसे में मारकंडा नदी उनकी मेहनत पर पानी फेर सकती है। प्रशासन को समय रहते अपनी तैयारी करनी चाहिए और कमजोर तटबंधों को पक्का कर उन पर नजर बनाए रखनी चाहिए, ताकि किसानों को कोई परेशानी न हो।
विभाग की सभी तैयारियां पूरी: एसडीओ
नहरी विभाग के एसडीओ राहिल सैनी ने कहा कि फिलहाल नदी का जलस्तर 3100 क्यूसेक है, जोकि खतरे के निशान के नीचे है। बावजूद इसके विभाग नदी पर निरंतर नजर बनाए हुए है। कर्मचारी नदी पर लगातार पेट्रोलिंग कर रहे हैं। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जेसीबी मशीन, मिट्टी से भरे बैग का पूरा प्रबंध कर लिया गया है, ताकि आपात स्थिति के दौरान जल्द से जल्द काबू पाया जा सके। किसानों व डेरा वासियों को घबराने की जरूरत नहीं है।
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