कस्बे में 30 मार्च से तीन दिवसीय चैत्र चौदस मेला शुरू हो रहा है। प्रशासन मेले के लिए बेहतर तैयारी के दावे कर रहा है, लेकिन ये दावे कितने सच है। इसका अंदाजा सरस्वती तीर्थ के घाटों पर फैली गंदगी और अव्यवस्थाओं से लगाया जा सकता है। मेला शुरू होने में पांच दिन शेष है, लेकिन अब तक मुख्य घाट की सफाई तक नहीं हुई है। यहां अभी भी कीचड़, काई और गंदगी फैली हुई है। घाट पर महिलाओं के लिए तीन स्नान घर बने हुए हैं। इनकी मरम्मत लंबे समय से नहीं हुई है। इससे महिला स्नान घर बदहाल हालत में हैं। इन स्नानघरों में से एक को प्रशासन ने कंडम घोषित कर दिया है और वहां चेतावनी बोर्ड भी नहीं लगाया है।
बता दें कि 30 मार्च से शुरू होने वाले मेले में छह लाख से ज्यादा श्रद्धालु शिरकत कर सकते हैं। मेले में करीब आधी संख्या महिला श्रद्धालुओं की रहेगी। सरस्वती तीर्थ पर तीन महिला स्नान घर है, इनमें एक जनाना घाट है और दो घाट प्रीत पीपल के आमने-सामने हैं। इन तीन घाट में से एक प्रेत पीपल के पास बने घाट को प्रशासन ने कंडम घोषित कर दिया है। शेष दो घाट की स्थिति भी अच्छी नहीं है। दोनों घाट की छत पर लगी फाइबर सीट जर्जर हो चुकी है। स्नानघरों के अंदर व बाहर कई जगह से पत्थर टूट चुके हैं। जनाना घाट पर बने स्नानघर में पत्थर उखड़े पड़े हैं और बिजली की तार भी बाहर निकली हुई। बेशक एक स्नानघर को प्रशासन ने कंडम घोषित कर दिया है, मगर आज तक यहां कोई भी चेतावनी बोर्ड नहीं लगाया गया। आश्चर्य की बात तो यह है कि हर दिन तीर्थ पर सैकड़ों और अमावस पर हजारों श्रद्धालु स्नान, पिंडदान व तर्पण के लिए पहुंचते हैं। फिर भी प्रशासन की ओर से यहां कोई उचित व्यवस्था नहीं की गई। एसडीएम सोनू राम ने बताया कि दोनों स्नानघरों की छत की मरम्मत करा दी जाएगी। बंदरों की उछल कूद के कारण छत पर लगी फाइबर फट गई है। इसे मेले से पहले दुरुस्त करा दिया जाएगा।