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अधिकारियों ने भेजी बारिश से फसल नुकसान की निल रिपोर्ट, नुकसान 30-35 प्रतिशत

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अधिकारियों ने बारिश से धान की फसल के नुकसान की रिपोर्ट निल भेज दी, मगर किसान 30-35 प्रतिशत नुकसान का दावा कर रहे है। किसान सरकार से मुआवजा भी मांग कर रहे है, जबकि राजस्व विभाग 25 प्रतिशत से कम नुकसान की रिपोर्ट बनाकर भेज चुका है। वहीं किसान अधिकारियों पर ग्राउंड लेवल पर बिना सर्वे किए ही नुकसान की रिपोर्ट भेजने का आरोप लगा रहे है। पिछले दिनों हुई बारिश से अनाज मंडी में पड़े धान के साथ-साथ खेतों में पक कर खड़ी फसल को भी नुकसान हुआ। इस पर राजस्व विभाग 25 प्रतिशत से कम का नुकसान बता रहा है, लेकिन किसान ज्यादा नुकसान का दावा कर रहे है। उनका आरोप है कि अधिकारियों ने सर्वे किए बिना ही कार्यालय में बैठकरनुकसान की रिपोर्ट बनाकर उनके साथ धोखा किया है। तेज बारिश से धान खेतों में बिछ गई। धान की निकासी पर प्रति एकड़ 7-8 क्विंटल नुकसान का अंदाजा है। वहीं दाने की क्वालिटी पर भी बुरा प्रभाव पड़ेगा और दाना काला पड़ जाएगा। वहीं कुछ किसान 50 प्रतिशत नुकसान का दावा जता रहे है। इस सप्ताह 18 अक्तूबर को जिलेभर में 14.58 एमएम बारिश दर्ज की गई, जिसमें पिहोवा में 25.5 एमएम व शाहाबाद में 24 एमएम बारिश हुई। इस बारिश के बाद सरकार ने नुकसान का आकलन करके गिरदावरी करने के आदेश दिए थे।
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मामले को राजस्व विभाग के जिला अधिकारी जिया लाल ने बताया कि उनकी ओर से नुकसान की निल रिपोर्ट सरकार को भेजी गई है। 25 प्रतिशत से कम नुकसान होने पर रिपोर्ट निल मानी जाती है। वहीं सरकार की ओर से भी कोई मुआवजा नहीं दिया जाता है।
गांव छज्जूपुर के किसान कंवलजीत सिंह ने बताया कि उसने पीआर-44 किस्म की धान लगाई है। बारिश से उसकी फसल का 30 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान हुआ है। प्रति एकड़ में करीब आठ क्विंटल नुकसान का अंदाजा है। उसके पास 20 एकड़ जमीन है। अंदाजा लगाया जाए तो उसका करीब तीन लाख रुपये का नुकसान हुआ है, मगर सरकार नुकसान नहीं मान रही है। आरोप लगाया कि सरकार ने धान में जलभराव का मुआवजा देना बंद कर दिया है।
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सज्जन सिंह ने बताया कि उसके पास 16 एकड़ जमीन है। बारिश से 50 प्रतिशत नुकसान का अंदाजा है। मांग है कि सरकार इस नुकसान का मुआवजा दे। नुकसान ज्यादा भी हो सकता है। बारिश से उसकी फसल बिछी हुई है। अब कटाई के बाद नुकसान का पता चलेगा।
जगरूप सिंह ने बताया कि फसल को बारिश और आग से ही नुकसान होता है। बारिश से उनकी फसल को 35 प्रतिशत नुकसान हुआ है। उसने सात एकड़ में पीआर-127 व आठ एकड़ में पीआर-128 किस्म की धान लगाई है। पीआर-127 में तो 20-25 प्रतिशत नुकसान है तथा पीआर-128 में 35 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान की आशंका है।
कुलदीप ने बताया कि बताया कि उसके पास 15 एकड़ जमीन है, जिसमें पीआर-14 धान लगाई है। बारिश से 35-40 प्रतिशत नुकसान हुआ है। सरकारी आदेश के बाद भी कोई भी अधिकारी सर्वे करने के लिए नहीं पहुंचा। हालांकि वह बारिश से पहले पांच एकड़ धान की कटाई करा चुका था, मगर 10 एकड़ में बारिश से फसल बिछ गई। इसकी कटाई में जहां समय ज्यादा लगेगा वहीं कटाई महंगी भी पड़ेगी।
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