राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता किसी एक धर्म विशेष के लिए नहीं, बल्कि इसमें संपूर्ण मानवता का सार है। जब तक सृष्टि रहेगी, तब तक इसकी प्रासंगिकता बनी रहेगी। उनके अनुसार हिंदू परंपरा को गीता मिली है, लेकिन उस पर किसी प्रकार का कोई पेटेंट नहीं है, यह ग्रंथ विश्व कल्याण के लिए है, जिसमें सभी समस्याओं और प्रश्नों का उत्तर समाहित है। सरसंघचालक बृहस्पतिवार को गीता ज्ञान संस्थानम में आयोजित ‘भगवत गीता की वर्तमान प्रासंगिकता’ पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आज जगह-जगह कट्टरता का भाव दिखाई दे रही है। आपस का विश्वास खोता जा रहा है। देशों में टकराव देखने को मिल रहा हैं। यह इसलिए हो रहा है, क्योंकि मनुष्य जात-पात और पंथ-संप्रदाय में स्वयं को विभाजित कर रहा है।
डॉ. मोहन राव भागवत के साथ हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय व मुख्यमंत्री मनोहर लाल और गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद भी मौजूद रहे। राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि हरियाणा की धरती हमारी सांस्कृतिक विरासत को संजोकर रखने और बौद्धिक चिंतन के उन्नयन का प्राचीनतम केंद्र रही है। यह भगवान श्रीकृष्ण की कर्म भूमि है। मान्यता है कि ‘हरि’ श्रीकृष्ण ने पहली बार जैसे ही अपने यान को इस पवित्र धरती पर उतारा तो इसे ‘हरि-याना’ कहा गया, जिसको कालांतर में ‘हरियाणा’ पुकारा जाने लगा।
मौके पर गीता ज्ञान संस्थानम में जीओ गीता की तरफ से पवित्र ग्रंथ गीता पर सर्टिफिकेट कोर्स का शुभारंभ किया गया। साथ ही बताया गया कि संस्थान की तरफ से आने वाले समय में गीता के डिप्लोमा और डिग्री कोर्स को भी वैश्विक स्तर पर शुरू किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव की तरह मनाया जाएगा श्री कृष्ण उत्सव : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने घोषणा करते हुए कहा कि धर्म नगरी में जिस प्रकार अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव का भव्य तरीके से आयोजन किया जाता है, उसी प्रकार आने वाले समय में श्री कृष्ण उत्सव भी मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र में श्री कृष्ण के विराट स्वरूप के अलावा विश्व स्तरीय संग्रहालय भी बनाया जा रहा है। इसमें महाभारत और सरस्वती सभ्यता की व्याख्या होगी। लाइट एंड शो के माध्यम से गीता का संदेश दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि धर्म क्षेत्र कुरुक्षेत्र को लैंड ऑफ श्री कृष्ण भी बनाना होगा, जिस प्रकार लोग श्री कृष्ण के विचारों और उनके जीवन का संदेश लेने के लिए वृंदावन, मथुरा व द्वारिका जाते हैं, उसी प्रकार कुरुक्षेत्र में भी आएंगे, क्योंकि वास्तव में जीवन का संदेश कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर ही दिया गया था।