संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। सहारनपुर-हरिद्वार राज्य राजमार्ग पर रात के समय सफर करना खतरनाक साबित हो रहा है। करीब ढाई साल पहले यहां लगाई गई स्ट्रीट लाइटों का बिजली कनेक्शन न हो पाने के कारण शाम ढलते ही अंधेरा सड़क को अपने आगोश में ले लेता है। पिपली से बीड़ मथाना तक पांच किलोमीटर एरिया में लगाई गई 98 स्ट्रीट लाइटें सफेद हाथी बनी हुई हैं।
इस मार्ग पर पिपली से बीड मथाना तक 500 से ज्यादा दुकानें हैं। रात के समय अंधेरे का फायदा उठाकर चोर दुकानोें में सेंधमारी करते हैं। इतना ही नहीं इस मार्ग पर छह गांव भी पड़ते हैं। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जाने वाले लोग भी इसी मार्ग का इस्तेमाल करते है। ऐसे में मार्ग पर 24 घंटे आवाजाही बनी रहती है। रात के समय यहां काफी भारी वाहन भी चलते हैं। इससे हर समय हादसा होने का अंदेशा बना रहता है।
पिपली चौक स्थित हरियाणा स्टेट वेयर हाउस कारपोरेशन के जिला मुख्यालय के बाहर नाले और सड़क का लेवल समान है। इससे रात के अंधेरे में सड़क का किनारा कहां खत्म होता है, पता नहीं चलता, जिस कारण वाहन नाले में गिर जाते हैं। इतना ही नहीं सड़क के किनारे कुछ लोगों ने झोपड़ियां भी बनाई हुई हैं। रात के समय इनमें रहने वालों को जान का खतरा रहता है।
पीडब्ल्यूडी इलेक्ट्रिकल विंग के एसडीओ आरएस पंवर ने बताया कि पिछले सप्ताह ही लाइटों को कनेक्शन ले लिया गया है। पिपली के पास की लाइटों का कनेक्शन पिपली पंचायत के नाम से लिया गया है। इन लाइटों की टेस्टिंग कर ली गई है। वहीं मथाना के पास की लाइटों का कनेक्शन मथाना की पंचायत के नाम लिया जाएगा। फिलहाल पंचायत का बिजली निगम के ऊपर करीब 10 लाख रुपये बकाया है। बकाया चुका देने के बाद बाकी की लाइटों का कनेक्शन भी करा दिया जाएगा। एक सप्ताह में ये लाइटें जगमगाती नजर आएंगी।
वहीं पिपली के निवर्तमान सरंपच के पति गुरप्रीत सिंह ने कहा कि पंचायत के पास खुद का कोई इनकम सोर्स नहीं है। ऐसे में मीटर लग भी जाए तो उसका बिल कौन भरेगा। पंचायत इन लाइटों का बिल भरने में असमर्थ थी। अधिकारियों के कहने के बाद करीब आठ माह पहले बिजली निगम के जेई लाइटों के कनेक्शन के लिए उनसे दस्तावेज लेकर गए थे।
एक सप्ताह में जल जाएंगी लाइट : मेवा सिंह
लाडवा के विधायक मेवा सिंह ने कहा कि उनकी बिजली निगम के अधिकारियों से बात हुई थी। लाइटों का बिजली कनेक्शन हो गया है। फिलहाल टेस्टिंग चल रही है। इस सप्ताह सभी लाइटें जगमगा उठेंगी। राहगीरों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।