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विद्यार्थियों को सरकारी स्कूल में टैब मिलना तो दूर पुस्तकें तक नहीं मिली 11111111

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एक तरफ सरकार ने विद्यार्थियों को टैब देने का दावा करती है। वहीं, दूसरी ओर सरकारी स्कूलों में टैब तो दूर विद्यार्थियों को नई पुस्तकें तक नहीं मिल पा रही हैं। कक्षा पहली से आठवीं तक के ज्यादातर विद्यार्थी जहां फटी-पुरानी पुस्तकों से पढ़ाई करने को मजबूर हैं। वहीं सैकड़ों विद्यार्थी ऐसे भी हैं जिन्हें न तो पुरानी पुस्तकें मिलीं और न ही कोई अन्य व्यवस्था हुई है।
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सरकार अभी तक पुस्तकें भी प्रकाशित नहीं करा सकी है। उधर, कोरोना के कारण बच्चों की पढ़ाई पहले ही बुरी तरह से प्रभावित हो चुकी है। अब जब स्कूल खुल चुके हैं तो उनके पास पढ़ने के लिए पुस्तकें ही नहीं हैं।
हालांकि स्कूल पहुंच रहे विद्यार्थियों को शिक्षक ऑनलाइन पाठ्य सामग्री से ही पढ़ाई करा रहे हैं। शिक्षा विभाग के अनुसार जिलेभर के राजकीय स्कूलों में 60 हजार से अधिक विद्यार्थी कक्षा पहली से आठवीं तक शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। पिछले साल यही आंकड़ा मात्र 50 हजार था। इन विद्यार्थियों को नि:शुल्क पुस्तकें उपलब्ध कराना मौलिक शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी थी, लेकिन शिक्षा विभाग की अनदेखी विद्यार्थियों के भविष्य पर भारी पड़ रही है। राजकीय स्कूल के शिक्षकों का कहना है कि वह इस संदर्भ में कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं, लेकिन स्कूल खुलने के बाद अभी तक भी विद्यार्थियों को पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो सकीं हैं। शिक्षकों ने अपने स्तर पर पुरानी पुस्तकें एकत्रित करके नई क्लास में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई हैं। हालांकि उसमें ज्यादातर पुस्तकें फटी हुई हैं, मगर मजबूरी में विद्यार्थी उनसे ही अपना काम चला रहे हैं। संवाद
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राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला उपाध्यक्ष नरेश फूले ने कहा कि पिछले साल के मुकाबले इस बार विद्यार्थियों की संख्या राजकीय स्कूलों में दोगुना हो चुकी है, लेकिन शिक्षकों ने अपने स्तर पर बच्चों को पुरानी पुस्तकें उपलब्ध कराई हैं, लेकिन ज्यादातर पुस्तकें फटी हुईं थीं। विद्यार्थियों की संख्या ज्यादा होने के कारण पुरानी पुस्तकें उपलब्ध कराने में असमर्थ हैं और मार्केट में पुस्तकें मिल नहीं रही। शिक्षा विभाग विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है।
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला महासचिव सुमित चौहान ने कहा कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही पुस्तकों के कागज की गुणवत्ता काफी हल्की है। ये पुस्तकें एक साल ही मुश्किल से चल पाती हैं। कुछ वर्क बुक होती हैं, जिस पर दोबारा काम नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग का विशेष ध्यान था, लेकिन जब जिम्मेदारी निभाने की बात आई तो पल्ला झाड़ रहा है।
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सतनाम भट्टी का कहना है कि कक्षा पहली से पांचवीं तक के विद्यार्थियों के बैंक खातों में पुस्तकों के पैसे डाले जा रहे हैं और कक्षा आठवीं तक के विद्यार्थियों को पुरानी पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं। उन्होंने बताया कि अभी सरकार ने पुस्तकें प्रकाशित करने के आदेश दे दिए हैं। आगामी एक माह तक सभी विद्यार्थियों को पुस्तकें उपलब्ध हो सकेंगी।
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