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केयू की शोधकर्ता को मिला लाखों का अनुदान

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शोधार्थी डॉ. प्रभजोत कौर। - फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग की शोधकर्ता डॉ. प्रभजोत कौर को एक प्रमुख परियोजना अनुदान के लिए चुना गया है। प्रदेश का कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय एकमात्र विश्वविद्यालय है, जिसे जीव विज्ञान के क्षेत्र में महिला वैज्ञानिक योजना-ए के तहत 31 लाख 19 हजार 472 रुपये की राशि परियोजना के अनुदान स्वरूप मिली है।
डॉ. प्रभजोत परियोजना अनुदान प्राप्त करने वाली भारत के 64 चयनित उम्मीदवारों में से एक हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार की ओर से केयू की सीएसआईआर रिसर्च एसोसिएट डॉ. प्रभजोत कौर का जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महिला वैज्ञानिक योजना-ए के तहत चयन किया गया है। कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने इस उपलब्धि के लिए डॉ. प्रभजोत कौर और प्रो. जितेंद्र शर्मा को बधाई देते हुए कहा कि महिलाएं शिक्षा, विज्ञान, साहित्य, खेल सहित अन्य क्षेत्रों में बहुत आगे हैं।
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केयू के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. जितेंद्र शर्मा साइंस इस परियोजना में डॉ. प्रभजोत कौर के मेंटर रहे हैं। प्रो. जितेंद्र शर्मा ने बताया कि यह परियोजना पर्यावरण के अनुकूल तरीके से जैव आधारित पैकेजिंग के लिए स्वदेशी शैवाल के उपयोग पर आधारित है, ताकि लकड़ी और प्लास्टिक पर निर्भरता को कम किया जा सके।
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उन्होंने बताया कि भारत शैवाल विविधता में समृद्ध है और इसकी क्षमता का पूरी तरह से पता लगाया जाना बाकी है। लकड़ी सेलुलोज के विकल्प के रूप में सेल्यूलोज के स्रोत के रूप में स्वदेशी शैवाल का उपयोग किया जाएगा। एल्गल सेलुलोज का उपयोग आगे पैकेजिंग अनुप्रयोग के लिए नैनोसेल्यूलोज के उत्पादन के लिए किया जा सकता है। कुछ बदलाव के साथ ऐसी पैकेजिंग के लिए प्लास्टिक के उपयोग को कम कर सकती है।
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