संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। विश्व जल दिवस के उपलक्ष्य में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग में बैठक का आयोजन किया गया। बैठक का मुख्य विषय भूजल के संदर्भ में अदृश्य को दृश्यमान बनाना रहा। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि अब पानी की बर्बादी को रोकने का समय आ गया है। जल प्रबंधन के नियमों को विनियमित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को कुछ कड़े कदम उठाने चाहिए।
भूजल विशेषज्ञ डॉ. नवीन नैने के मार्गदर्शन में जिला इंप्लीमेंट पार्टनर टीम के सदस्यों (एक्साल्ट्स सोसाइटी जयपुर) ने विद्यार्थियों को जागरूक किया। भूविज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. नरेश सागवाल ने ग्राम स्तर, ब्लॉक स्तर और जिला स्तर पर जल संरक्षण तकनीकों के लिए अपने सर्वोत्तम सुझाव दिए। डॉ. नरेश सागवाल ने डीआईपी टीम को बताया कि राजस्थान के लोग प्राकृतिक संसाधन (जल) के महत्व को जानते हैं।
वे लोग बरसात के पानी की एक-एक बूंद को घरेलू उपयोग, पशुओं के उपयोग और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए संरक्षित करते हैं। उन्होंने कहा राजस्थान का मरुस्थलीय भाग हरियाणा की ओर बढ़ रहा है, क्योंकि हम तेजी से निकासी के साथ भूजल को कम कर रहे हैं और हमारे पास वर्षा जल संरक्षण करने के लिए कोई उचित प्रबंधन और तकनीक नहीं है।
अब पानी की बर्बादी को रोकने का समय आ गया है और जल प्रबंधन के नियमों को विनियमित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को कुछ कड़े कदम उठाने चाहिए। इसलिए, ग्रामीणों को भूविज्ञान और जल विज्ञान में शिक्षित करना चाहिए क्योंकि दोनों महत्वपूर्ण विषय आपस में जुड़े हुए हैं।
उन्होंने डीआईपी टीम के सदस्यों से कहा कि वह अटल भूजल योजना में उनकी वैज्ञानिक मदद के लिए हमेशा तैयार हैं। उन्होंने डॉ. नवीन नैन को कई महत्वपूर्ण शोध पत्र प्रदान किए। इस मौके पर डॉ ओमप्रकाश ठाकुर, डॉ सतीश कुमार, यशपाल, पार्यंत अश्विनी, स्वाति राणा, जयपाल बनवाला, सरिता मान मौजूद रहीं।