संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। विश्व रंगमंच दिवस पर हरियाणा कला परिषद ने कुरुक्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर नुक्कड़ नाटकों का मंचन किया। हलकारा ए थिएटर ग्रुप के कलाकारों ने डॉ. पूनम तुषामड़ की ओर से लिखे गए और अमित कुमार चौहान की तरफ से निर्देशित नाटक ये कैसी आजादी का मंचन कर आजादी का महत्व बताया।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, ब्रहमसरोवर सहित विभिन्न स्थानों पर किए गए नुक्कड़ नाटक में कहानी स्वतंत्रता दिवस वाले दिन के इर्द गिर्द घूमती है। नाटक शुरू होता है आजादी के दिन को मनाने की तैयारी में जुटे बच्चों से। उनकी जो खुशी है वह दिखाते हुए एक ऐसे मोड़ पर पहुंचता है जहां पर एक बच्चा अपने दादा को 15 अगस्त के अवसर पर ध्वजारोहण के लिए कहता, लेकिन उसके दादा, जो कि आर्मी से रिटायर्ड हैं, 15 अगस्त के इस दिन को आजादी का दिन मानने से मना कर देते हैं।
वह कहते हैं कि इस दिन इस देश का बंटवारा हुआ था। बहुत लोग मारे गए थे। यह दुख की बात है, खुशी की बात नहीं है। तब बच्चा कहता है कि दादा अगर ऐसे ही हम पुरानी बातों को आज तक सीने से लगाए रखेंगे तो हम कभी भी आजाद नहीं हो पाएंगे। अंग्रेजों की गुलामी से जो आजादी मिली, जिस आजादी को पाने के लिए हमारे इतने सारे लोगों ने अपनी कुर्बानियां दी, क्या ये उनका अपमान नहीं होगा। ऐसा कर के क्या हम उनकी शहादतों को व्यर्थ नहीं कर रहे।
हमें दुख है उस बंटवारे का, लेकिन हमें इतिहास में घटी दुखद घटना से सबक ले कर उन गलतियों से सीखना चाहिए और धीरे-धीरे उन बुरी यादों को भुला कर आगे बढ़ना होगा। अंत में दादा अपने पौत्र की बात मान जाते हैं। नाटक में ज्योति सिंह जेनी, तुषार, बीरबल सिंह, पार्थ शर्मा, सूर्यांश और सूरज सूरज ने अभिनय किया। इस अवसर पर हरियाणा कला परिषद के मीडिया प्रभारी विकास शर्मा, शिवानी बोहत, अमन कुमार आदि मौजूद रहे।