विश्व रक्तदाता दिवस पर अमर उजाला फाउंडेशन और सर्व समाज कल्याण सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में पार्थ ब्लड सेंटर में रक्तदान शिविर लगाया गया। शिविर में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के चैक ब्रांच से सहायक चंद्रभूषण और अजय कुमार मुख्य रूप से पधारे। चंद्रभूषण ने शिविर में स्वयं भी रक्तदान किया और रक्तदाताओं से आह्वान किया कि वे तीन माह के अंतराल पर अवश्य रक्तदान करें।
रक्तदान से शरीर में कमजोरी नहीं आती, बल्कि नई ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने बताया कि लोगों द्वारा रक्तदान करने से दिल की सेहत में सुधार, दिल की बीमारियों और स्ट्रोक के खतरे को कम माना जाता है। खून में आयरन की ज्यादा मात्रा दिल के दौरे के खतरे को बढ़ा सकती है। नियमित रूप से रक्तदान करने से आयरन की अतिरिक्त मात्रा नियंत्रित हो जाती है। जो दिल की सेहत के लिए अच्छी है। अजय कुमार ने इमरजेंसी में खून की आपूर्ति के लिए लोगों को रक्तदान करने के लिए आगे आना चाहिए। इससे जरुरत मंद की मदद हो सकेगी। इस अवसर पर समिति के प्रदेशाध्यक्ष रामेश्वर सैनी, प्रदेश उपाध्यक्ष कर्मवीर सैनी, तरुण वधवा, अविनाश कौर, टोनी रोहिल्ला, सुखविंद्र सिंह मौजूद रहे। शिविर में रवि कुमार, कुलदीपक, सुरेंद्र, अशोक कुमार, अजय कुमार, चंद्रभूषण, मोहित धनखड़, विकास, लेखराज, सुखविंद्र सिंह व गौरव वर्मा सहित 12 रक्तदाताओं ने रक्तदान किया। शिविर में पार्थ ब्लड सेंटर से तकनीकी अधिकारी संजीव वर्मा की अध्यक्षता में टीम ने रक्त एकत्रित किया।
शिविर में रवि ने आठवीं बार रक्तदान किया। कहा कि जब भी वह रक्तदान करते हैं उन्हें सुख की अनुभूति होती है। इस नेक कार्य के लिए वह हमेशा तैयार रहते हैं। सभी को आगे आकर रक्तदान करना चाहिए।
तीसरी बार रक्तदान करने पर अजय कुमार ने कहा कि रक्तदान करके हम किसी अनजान की जान बचा सकते हैं। अगर हर कोई इसे अपनी जिम्मेदारी समझे तो ब्लड बैंकों में कभी भी रक्त की कमी नहीं होगी।
चंद्र भूषण ने कहा कि उन्होंने पहली बार रक्तदान किया है। काफी अच्छा लग रहा है। वह बार हर तीन माह बाद रक्तदान किया करेंगे।
कुलदीपक ने कहा कि रक्तदान करने से शरीर स्वस्थ रहता है। बेशक उन्होंने दूसरी बार रक्तदान किया है, लेकिन यह सिलसिला हमेशा जारी रहेगा।
मोहित ने कहा कि वह पांच बार रक्तदान कर चुके हैं और लोगों को भी इस नेक कार्य के लिए जागरूक करते रहते हैं। हमें हमेशा खुद के बारे में न सोचकर दूसरों के लिए भी सोचना चाहिए।
अशोक कुमार ने कहा कि वह 12 बार रक्तदान कर चुके हैं। रक्तदान करते ही यह देखते हैं कि अब तीन का माह का समय कब पूरा होगा जब फिर से रक्तदान कर सकेंगे।
विकास का कहना है कि रक्तदान महादान है और इस महादान से हम किसी अनजान की जान बचा सकते हैं। हमारा दान किया रक्त किसे चढ़ाया जाएगा बेशक हमें न पता हो, लेकिन यह खुशी होती है कि हम किसी ना किसी के काम आए हैं।
लेखराज ने कहा कि अमर उजाला फाउंडेशन और सर्व समाज कल्याण सेवा समिति की तरह अन्य संस्थाओं को भी आगे आकर इस प्रकार के सामाजिक कार्यों में अपना योगदान देना चाहिए।
शिविर में सुखविंद्र ने 12वीं बार रक्तदान किया। कहा कि हमें यह भी सोचना चाहिए कि कभी हमें भी अपने किसी परिचित के लिए रक्त की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसे में हमारा दायित्व बनता है कि हम ब्लड बैंकों में रक्त की कमी न होने दें।