19 साल बाद आखिरकार सोमवार को रणजीत के हत्यारे गुरमीत राम रहीम सहित पांच दोषियों को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। फैसले के बाद रणजीत के पुत्र जगसीर सिंह ने कहा कि उन्हें विश्वास था कि सत्य की जीत होगी और लंबे इंतजार के बाद उन्हें इंसाफ मिला है। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों के बाद भी उन्होंने इस लड़ाई को कमजोर नहीं होने दिया।
जगसीर ने बताया कि 10 जुलाई 2002 की शाम का वो खौफनाक मंजर याद कर आज भी परिजन के साथ-साथ ग्रामीण भी सहम जाते हैं। शाम चार बजे का समय था, जब पिता रणजीत खेत में चाय लेकर जाने लगे थे। तब मैं सात साल का था। मैंने भी साथ चलने की जिद की, लेकिन मुझे लेकर नहीं गए। थोड़ी देर बाद सूचना आई कि पिता को किसी ने गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया।
परिवार के साथ-साथ पूरे गांव में मातम छा गया था। मां की चीख पुकार आज भी कान में गूंजती है। घटना के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया। मैं छोटा था, लेकिन दादा जोगेंद्र सिंह किस प्रकार अपने पुत्र को इंसाफ दिलाने के लिए संघर्ष करते रहे, उसका गवाह रहा। दादा-दादी अपने पुत्र की तस्वीर को सीने से लगाकर रोया करते थे। जब बड़ा हुआ तो धीरे-धीरे सारा मामला समझ गया। दादा-दादी ने आखिरी दम तक इंसाफ की लड़ाई लड़ी। आज उनके संघर्ष की बदौलत ही पिता रणजीत को इंसाफ मिला और दोषियों को सजा हुई है। यह इंसाफ की लड़ाई थी और अंत में सच की जीत हुई है।
गांव छावनी में हो गया था तब्दील, डर के मारे घर से नहीं निकले थे ग्रामीण
वर्तमान समय में बेशक रोजाना कहीं न कहीं गोली कांड होता है, लेकिन 19 साल पहले इस प्रकार की वारदात बहुत बड़ी घटना थी। मामला डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम से जुड़ा था तो गांव के हालात काफी खराब हो गए थे, क्योंकि उन दिनों राम रहीम काफी प्रभावशाली था। हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश में उसके बहुत अनुयायी थे। इतना ही नहीं बड़े-बड़े राजनेता भी उसके समक्ष नतमस्तक हुआ करते थे। उन दिनों जब रणजीत की हत्या हुई तो कुरुक्षेत्र स्थित रणजीत का गांव खानुपर कोलियां छावनी में तब्दील हो गया था। परिजनों के साथ-साथ ग्रामीण भी इतना डरे हुए थे कि कोई भी घर से बाहर नहीं निकल रहा था। करीब डेढ़ माह तक गांव में ऐसा ही माहौल बना रहा। गांव में हालात सामान्य होने में एक साल से भी ज्यादा का समय लग गया था।
यह भी पढ़ें:
कुंडली बॉर्डर हत्याकांड: किसान नेता बोले-निहंगों को हमने नहीं बुलाया, वापस जाने का फैसला वही लेंगे
घर पर रही कड़ी सुरक्षा, ग्रामीणों को भी था फैसले का इंतजार
सोमवार को अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के एक दिन पहले से ही सुरक्षा के मद्देनजर गांव खानपुर कोलियां स्थित रणजीत के निवास पर पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया गया था। सजा सुनाए जाने तक गांव की गलियां सुनसान नजर आईं। ग्रामीण टीवी और इंटरनेट के माध्यम से लगातार कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे थे। दोषियों को उम्रकैद होने पर भले ही खुलकर किसी ने प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन दबी जुबां सभी कह रहे थे कि आखिर सच जीत गया।
शक के आधार पर की थी रणजीत की हत्या
डेरे के कुछ अनुयायियों और डेरा प्रबंधन को शक था कि साध्वी यौन शोषण मामले में रणजीत ने ही गुमनाम चिट्ठी लिखवाई थी। इस कारण ही रणजीत की गोलियां मारकर हत्या कर दी गई। रणजीत के पिता जोगेंद्र सिंह ने 2003 में पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने बेटे की हत्या की जांच सीबीआई से करवाने की मांग की थी, जिसे सीबीआई ने मंजूर कर लिया था। 19 साल तक चली सुनवाई के बाद रणजीत हत्याकांड का फैसला 8 अक्तूबर को आया था। सीबीआई अदालत ने डेरा प्रमुख सहित अन्य आरोपियों को दोषी माना था। सोमवार को सीबीआई अदालत ने डेरा प्रमुख व चार अन्य आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।