एबीवीपी के सदस्यों ने हॉस्टल फीस कम करने सहित तीन मांगों के समर्थन में कुलपति कार्यालय के बाहर जमकर प्रदर्शन किया। गुस्साए छात्र नेताओं ने पहले कुलपति कार्यालय के बाहर विवि प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। काफी इंतजार के बाद जब कोई अधिकारी आश्वासन नहीं देने पहुंचा तो छात्र नेता कुलसचिव कार्यालय में के साथ लगे विजिटर रूम में घुस गए। इससे पहले विश्वविद्यालय के सुरक्षा कर्मियों और छात्र नेताओं के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। यहां पर छात्र नेताओं ने विवि प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
डीएसडब्ल्यू प्रो. अनिल वशिष्ठ ने छात्र नेताओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन छात्र कुलसचिव से मुलाकात करने पर अडिग रहे। मामला बढ़ता देख विश्वविद्यालय प्रशासन को मौके पर पुलिस बुलानी पड़ी। दोपहर दो से पौने तीन बजे पुलिस की उपस्थिति में कुलसचिव डॉ. संजीव शर्मा और छात्र नेताओं बीच मांगों पर बातचीत हुई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि इस संदर्भ में सोमवार तक पत्र जारी किया जाएगा, जिसके बाद छात्र नेता शांत हुए।
इससे पहले एबीवीपी के छात्र नेताओं ने नारेबाजी करते हुए स्नातक के विभिन्न पाठ्यक्रमों के उन विद्यार्थियों को ऑफलाइन क्लास लगाने की अनुमति देने की मांग की। इनकी परीक्षाएं फरवरी और मार्च माह में होनी है। एबीवीपी ने दिसंबर में होने वाली पीजी पाठ्यक्रमों की परीक्षाओं के संबंध में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। कैंपस अध्यक्ष जयंत चौधरी एवं छात्र नेता हिमांशु ठाकुर ने कहा कि विश्वविद्यालय छात्र हितों की अनदेखी कर रहा है। सोमवार से सिर्फ स्नातक व स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए कैंपस खोला गया है, लेकिन जिन यूजी पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों की फरवरी और मार्च में परीक्षाएं होनी है। उन विद्यार्थियों को ऑफलाइन कक्षा लगाने का मौका नहीं दिया गया। विश्वविद्यालय ने कोरोना के बाद हॉस्टल की फीस में बढ़ोतरी कर दी है और सर्वेंट चार्ज भी विद्यार्थियों से वसूला जा रहा है, जिसका एबीवीपी विरोध कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर विवि की ओर से सोमवार तक उनकी मांगों के समर्थन में फैसला नहीं लिया तो वे आंदोलन शुरू करने को मजबूर होंगे। इस मौके पर कैंपस संयोजक पवन कौशिक, निखिल, नितिन, रोहित, रोहित हुड्डा, सौरभ भड़ाना, हर्ष, आर्यन, विवेक, भवदीप उपस्थित रहे।