आबादी के साथ शहर का दायरा जरूर बढ़ा, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है। जिले की दस लाख से अधिक आबादी के सेहत की जिम्मदारी महज 81 चिकित्सकों के कंधों पर है। इसके अलावा 16 पीएचसी और सात सीएचसी स्तर पर स्थिति और भी चिंताजनक है। जिला अस्पताल, पीएचसी और सीएचसी के 169 में से रिक्त पड़े 88 पदों पर अभी तक चिकित्सकों की भर्ती नहीं की गई है। एलएनजेपी अस्पताल में चिकित्सकों के 55 में से 28 पद खाली पड़े हैं। यहां महज 27 डॉक्टर ही सेवाएं दे रहे हैं।
जानकारी के अनुसार सरकार और स्वास्थ्य विभाग बिना डॉक्टरों के ही कोरोना की संभावित तीसरी लहर से मुकाबले की तैयारी में है। चिकित्सकों और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण सीएचसी से मरीजों को जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है, लेकिन यहां भी बिस्तर की किल्लत के साथ-साथ दवाओं का टोटा हमेशा रहता है। इसलिए मरीजों को बाहर निजी मेडिकल स्टोर से महंगे दामों में दवा खरीदनी पड़ रही है। वर्ष 2011 में शहर की 9 लाख 65 हजार आबादी की सेहत का ख्याल 70 चिकित्सक रख रहे थे, लेकिन पिछले दस सालों में मात्र दस चिकित्सक ही बढ़े हैं, जबकि आबादी 12 लाख पार हो चुकी है।
बता दें कि बेकाबू हुई कोरोना की दूसरी लहर में स्वास्थ्य विभाग को आयुर्वेदिक चिकित्सकों और राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के शोधार्थियों का सहयोग लेना पड़ा था। इसके बाद भी सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं की गई। कहीं-कहीं तो एक डॉक्टर के कंधों पर कई गांव के लोगों के इलाज का जिम्मा है। ग्रामीण क्षेत्र से मरीज बेहतर उपचार की आस के साथ कई किमी का सफर तय कर जिला अस्पताल पहुंचे हैं, लेकिन कई बार बिना इलाज कराए लौटना पड़ता है या फिर निजी अस्पताल की शरण लेनी पड़ती है।
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मात्र एक ही स्त्री रोग विशेषज्ञ
सबसे बुरे हालात जिला अस्पताल के प्रसूति विभाग के हैं। यहां एक समय में 100 से ज्यादा जच्चा-बच्चा दाखिल रहते हैं, जिनके सेहत का बोझ मात्र एक ही स्त्री रोग विशेषज्ञ के कंधों पर है। बढ़ते बोझ के चलते पहले 3-4 स्त्री रोग विशेषज्ञ नौकरी छोड़ चुकी हैं। इसके अलावा बाल रोग विशेषज्ञों की स्थिति ये है कि तीन लाख बच्चों की आबादी पर महज चार बाल रोग विशेषज्ञ हैं। इनमें से एक बाल रोग विशेषज्ञ अस्पताल की एसएनसीयू को संभाल रहा है, जबकि यहां चार एमओ की आवश्यकता है।
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जिला अस्पताल और सीएचसी स्वीकृत पद रिक्त पद
-जिला अस्पताल 55 28
-सीएचसी झांसा 06 01
-सीएचसी लाडवा 07 02
-सीएचसी बाबैन 07 04
-सीएचसी शाहाबाद 42 39
-सीएचसी पिहोवा 07 03
-मथाना सीएचसी 04 04
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-पीएचसी स्वीकृत पद रिक्त पद
-पीएचसी बरोट 02 02
-ठसका मीराजीं 02 01
-पीएचसी रामगढ़ रोड 02 01
-पॉली क्लीनिक 02 01
-पीएचसी सारसा 02 02
-खानपुर कोलियां 02 01
-पिपली 02 01
-जिला डिस्पेंसरी 01 01
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सीएचसी शाहाबाद में बनना है 100 बेड का भवन, 42 में से तीन डॉक्टर दे रहे सेवा
सीएचसी शाहाबाद एसएमओ के अलावा महज दो डॉक्टर के सहारे चल रही है। बता दें कि दिल्ली-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे पर जिले की एकमात्र सीएचसी है। यहां डॉक्टरों की 42 पदों की स्वीकृत है, लेकिन यहां एसएमओ सहित तीन डॉक्टर ही सेवाएं दे रहे हैं। बताया गया कि यहां 100 बेड का अस्पताल बनाने की घोषणा की गई है। फिलहाल सीएचसी में रोजाना 200 से अधिक मरीज उपचार कराने पहुंच रहे हैं, कई बार डॉक्टर छुट्टी पर होने के चलते मरीजों को वापस लौटना पड़ता है।
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आगामी एक सप्ताह में जारी किया जाएगा विज्ञापन: डॉ. वीना सिंह
स्वास्थ्य विभाग की महानिदेशक डॉ. वीना सिंह ने कहा कि चिकित्सक सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के रिक्त पदों पर जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। रिक्त पदों पर भर्ती कराने के लिए मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री की ओर से अनुमति मिल गई है। आगामी एक सप्ताह तक विज्ञापन जारी किया जाएगा।