करनाल। बडे़ चेते आउंदे ने यार अनमुल्ले...नीरज चोपड़ा की स्वर्णिम उपलब्धि के बाद उसके खिलाड़ी दोस्त भी पूरी तरह उत्साहित है। अब ये दोस्त नीरज के साथ हॉस्टल में बिताए पांच सालों के पलों याद कर और ज्यादा गौरवान्वित हो रहे हैं, क्योंकि आज उनका दोस्त नीरज ओलंपियन गोल्ड मेडलिस्ट बन चुका है। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में इन दोस्तों ने नीरज के साथ अपने संस्मरणों को साझा किया।
करनाल निवासी जेवनिल थ्रो के खिलाड़ी एवं कोच मोहित सैनी बताते हैं कि मई 2011 से 2015 तक वे लोग पंचकूला स्पोर्ट्स हॉस्टल में नीरज के साथ रहते थे। उस कमरे नीरज के साथ वह खुद और उनके दोस्त नरेंद्र, हरेंद्र सिंह, परविंद्र व बिट्टू देशवाल रहते थे। सभी खिलाड़ी थ्रो इवेंट के थे। मोहित सैनी ने बताया कि नीरज यारों का यार, चंचल और बिंदास प्रवृति का शख्स है। लेकिन अपने खेल के प्रति जितनी गंभीरता नीरज में है, उसी की बदौलत आज उन्होंने गोल्ड जीता है।
नीरज चोपड़ा पनीर की सब्जी बहुत अच्छे से बनाता था और जब किसी दिन दोस्त मासाहारी भोजन के लिए कहते, तो उन्हें मना करते हुए सदैव शाकाहारी रहने की सलाह देता था। जब कभी दोस्तों में किसी बात को लेकर झगड़ा हो जाता, तो नीरज उस दिन शाम को अलग से लजीज व्यंजन तैयार करता और सभी दोस्तों को संग बैठाकर खिलाता, ताकि दोस्तों का मनभेद एक साथ बैठकर खाने के दौरान ही खत्म हो जाए।
चाचा कहते थे- एक दिन ओलंपिक में राष्ट्रगान बजवाना है
लंबे बाल रखने और बाइक पर स्टंट करने का शौकिन नीरज अकसर दोस्तों से कहता था कि जेवलिन में एक दिन तो ओलंपिक में हरियाणा का लठ गाड़ना ही है। बाइक पर दोस्तों को बैठाकर वे कई बार स्टंट करता था। दोस्तों के घरेलू आयोजनों में उनके घर जाकर वे एक परिजन के तरह अपना दायित्व भी निभाता था और खुशी के अवसरों पर यारों के साथ खूब मस्ती भी करता था। नीरज के सबसे छोटे चाचा सुरेंद्र नीरज को हमेशा प्रोत्साहित करते रहते थे। वे जब भी हॉस्टल मिलने आते थे तो यही कहते थे ‘नीरज एक दिन ओलंपिक में देश् का झंडा बुलंद कर वहां तिरें के साथ राष्ट्रगान बजवाना है।’
...जब दोस्तों ने भूत बनकर डराया
मस्ती का एक किस्सा सुनाते हुए दोस्त सैनी बताते है कि एक बार पंचकूला में हम सभी दोस्त फिल्म देख कर रात को लौटे तो नीरज समेत सभी ने फैसला लिया कि हॉस्टल में मौजूद अन्य खिलाड़ियों को क्यों न भूत बनकर डराया जाए। फिर क्या था सभी दोस्त नकली भूत बन गए और उन्होंने विभिन्न तरीकों से डरावनी आवाजें निकालकर हॉस्टल के अन्य खिलाड़ियों को खूब डराया। नीरज बादाम घोटकर उससे बादाम रोगन बनाता और दोस्तों को भी खूब खिलाता। उसका मानना था कि बादाम से दिमाग भी तेज होगा और शरीर में ताकत भी आएगी। दोस्तों ने नीरज को करनाल बुलाकर उसके सम्मान में बड़ा आयोजन करने का भी विचार बनाया है।