करनाल। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में वरिष्ठता सूची के सरकारी नियमों को ताक पर रखकर पदोन्नति के मामले में 45 कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। मेडिकल कॉलेज के निदेशक ने उनसे 15 दिन में इस संबंध में जवाब मांगा है। निदेशक ने कहा है कि आपकी पदोन्नति गलत तरीके से हुई है। आपको पहले वाले पद पर क्यों न भेज दिया जाए। नोटिस जारी होने के बाद मेडिकल कॉलेज में हड़कंप की स्थिति है।
मेडिकल कॉलेज में 2014 से 2019 तक तत्कालीन अधीक्षक रूप सिंह कुहाड़ व तत्कालीन मेडिकल कॉलेज निदेशक डॉ सुरेंद्र कश्यप के द्वारा कुछ कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी नियमों को ताक पर रखकर गलत तरीके से वरिष्ठता सूची जारी की गई। इसमें चहेते 45 कर्मचारियों को पदोन्नति दी गई। इनमें असिस्टेंट से डिप्टी सुपरिटेंडेंट, क्लास फोर से क्लर्क, पर्सनल असिस्टेंट से प्राइवेट सेक्रेटरी, फार्मासिस्ट से चीफ फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स से नर्सिंग सिस्टर, नर्सिंग सिस्टर से असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिटेंडेंट के अलावा स्टोर कीप, थियेटर मास्टर भी शामिल हैं।
इसके बाद 30 सितंबर 2019 को मुख्य सचिव ने आदेश जारी करते हुए कहा कि पदोन्नति में पिछले विभाग में की गई सर्विस नहीं जोड़ी जाएगी। इस पत्र के जारी होने पर पदोन्नति पाने वाले कर्मचारियों में उस समय भगदड़ मच गई और उन्होंने इस आदेश के विरुद्ध हाई कोर्ट में याचिका दायर की और कहा कि पिछली सर्विस जोड़ी जाए और पदोन्नति बरकरार रखें। जिस पर हाई कोर्ट ने मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ जगदीश चंद्र दुरेजा को आदेश दिए कि वह अपना स्पीकिंग ऑर्डर दें कि यह मांग सही है या गलत। जिस पर 12 फरवरी 2021 को 11 कर्मचारियों को उनकी मांग के खिलाफ स्पीकिंग ऑर्डर जारी किए कि उनकी जो मांग है वह जायज नहीं है।
इस दौरान वरिष्ठता से वंचित कर्मचारियों ने कोर्ट में गुहार लगाई कि निदेशक स्पीकिंग ऑर्डर लागू कर उनकी वरिष्ठता सूची सरकारी नियमों के अनुसार बनाएं। इस केस में निदेशक से हाई कोर्ट ने स्पष्टीकरण मांगा कि आपका स्पीकिंग आर्डर ठीक है या नहीं। इसके बाद निदेशक ने 45 कर्मचारियों को शो कॉज नोटिस जारी कर दिया है। इस गलत वरिष्ठता सूची व पदोन्नति से सरकार को लाखों रुपये का नुकसान हुआ, अब वरिष्ठता से वंचित कर्मचारियों में न्याय उम्मीद जगी है।
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कोर्ट के आदेश पर और मुख्य सचिव की जांच के बाद ही इन कर्मचारियों को शो कॉज नोटिस जारी किया गया है। कर्मचारियों को 15 दिन का समय दिया गया है। इसके बाद इन्हें रिवर्ट कर दिया जाएगा। - डॉ. जगदीश दुरेजा, निदेशक, कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कालेज करनाल।