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दो दिन में नहीं हुआ पूरा उठान, मंडी में फिर जाम के हालात

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संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। दो दिन खरीद बंद होने पर करनाल अनाज मंडी में मंगलवार सुबह पांच बजे किसानों के गेटपास कटने शुरू हो गए। इस दौरान मंडी के सभी गेटों पर किसानों की ट्रैक्टर ट्राली के साथ लंबी लाइनें लगी रहीं। वहीं जीटी रोड सर्विस लाइन पर भी किसान धान से भरी ट्रैक्टर ट्राली लेकर खड़े रहे। ऐसे में अनाज मंडी में दोबारा जाम के हालात बनते नजर आ रहे हैं, क्योंकि दो दिन में अनाज मंडी से पूरा धान नहीं उठाया गया। ऐसे में अनाज मंडी में दोबारा धान की ढेरियां लगनी शुरू हो गई है। उधर मंडियों में बारिश से भीगने के चलते कुछ धान हरा पड़ गया है जिसे किसान सस्ते दाम पर बेचने को मजबूर हैं।
मार्केट कमेटी के अधिकारी अनाज मंडी में यूपी का धान आने से रोकने में असमर्थ हैं। मंगलवार को भी यूपी के किसान अनाज मंडी में धान लेकर पहुंचे थे। जिले में अब तक 6 लाख 24 हजार 602 मीट्रिक टन धान की आवक हुई है।
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किसानों को 72 घंटे के अंदर भुगतान के प्रयास : डीसी निशांत
इंद्री, ब्याना और कुंजपुरा अनाज मंडी का किया दौरा
इंद्री। डीसी निशांत कुमार ने मंगलवार को इंद्री व कुंजपुरा की अनाज मंडी तथा खरीद केंद्र ब्याना का दौरा किया और किसानों को उनकी उपज की समय पर अदायगी और धान उठान जैसी व्यवस्थाओं की जांच की। डीसी ने कहा कि इंद्री मंडी में अब तक कुल आवक की 70 प्रतिशत लिफ्टिंग हो चुकी है तथा किसानों को 66 करोड़ से अधिक का भुगतान भी किया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि पेमेंट 72 घंटे के अंदर ही हो, इसके प्रयास जारी रहेंगे। उन्होंने मंडी अधिकारियों तथा खरीद के नोडल व एसडीएम इंद्री सुमित सिहाग को निर्देश दिए कि मंडी में जो धान बोरियों में डाला जा चुका है, उसकी साथ-साथ लिफ्टिंग सुनिश्चित रहे। ट्रांसपोर्टर की ओर से जितने ट्रकों को लिफ्टिंग में लगाया गया है, उनकी जांच करें, बताए गए सभी ट्रकों को एक लाइन में खड़ा करवा गिनती करें।
उपायुक्त ने मंडी में मौजूद अधिकारियों से कहा कि लिफ्टिंग पर पूरा फोकस रखें और ट्रांसपोर्टर द्वारा लगाए गए ट्रकों की गिनती करें। इस अवसर पर एसडीएम करनाल गौरव कुमार तथा मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन ईलम सिंह भी मौजूद थे। संवाद
दूसरे जिलों के धान पर रोक, पानीपत के कुछ गांव के किसान ला सकेंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
घरौंडा। नई अनाज मंडी में करनाल व मार्केट कमेटी से जुड़े पानीपत के कुछ गांव के किसान ही धान लेकर आ सकते हैं। विभागीय अधिकारियों ने दूसरे जिलों के किसानों पर धान की एंट्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। बाहरी धान पर पाबंदी लगने से न सिर्फ मंडी में लिफ्टिंग का काम सुचारु हो पाएगा, बल्कि किसानों को घंटों तक लाइनों में भी नहीं लगना पड़ेगा। माना जा रहा है कि बाहरी क्षेत्रों की धान मंडी में पहुंचने से उत्पन्न हुई अव्यवस्थाओं के कारण यह फैसला लिया गया है।
दूसरे जिलों से कई दिनों से अनाज मंडी में धान पहुंच रही थी। अव्यवस्थित मंडी को व्यवस्थित करने के लिए सरकार ने दूसरे जिलों के प्रवेश को घरौंडा की मंडी में प्रतिबंधित कर दिया है। गेट पास सिर्फ करनाल के किसानों के ही काटे जा रहे हैं और पानीपत जिले के कुछ गांव ही घरौंडा मंडी में धान लेकर आ सकते हैं। विभागीय अधिकारियों ने दूसरे जिले के किसानों पर 16 अक्तूबर से पाबंदी लगा दी है। जिसके बाद मंडी में लिफ्टिंग के कार्य को पटरी पर लाने के लिए 17 व 18 अक्तूबर को मंडी में आवक को बंद कर दिया गया।
दो दिन में मंडी से करीब साढ़े चार लाख कट्टों का उठान किया गया। जिससे मंडी में पहुंचने वाली धान के लिए जगह बनी। मंगलवार सुबह किसानों के गेटपास काटे जाने का काम शुरू किया गया। मंगलवार को करीब 90 हजार कट्टों का उठान हुआ और लगभग 90 हजार क्विंटल धान की आवक भी हुई है। मंडी एसोसिएशन के प्रधान रामलाल गोयल व सचिव सुरेश मित्तल का कहना है कि दो दिन में मंडी से लगभग साढ़े चार लाख धान के कट्टों का उठान हुआ, लेकिन मंगलवार को धान की आवक होने से मंडी में लिफ्टिंग का कार्य धीमा रहा। ऐेसे में आने वाले दिनों में धान की आवक तेजी पकड़ेगी। मंडी में बाहरी जिलों की धान पर पांबदी लगने से थोड़ी राहत जरूर मिली है।
विभागीय अधिकारियों ने 16 अक्टूबर से दूसरे जिलों के किसानों पर पाबंदी लगा दी है। अब केवल करनाल व पानीपत जिले से कुछ गांव के किसान मंडी में धान ला सकते हैं। पानीपत से वही किसान धान लेकर आ सकते हैं, जो घरौंडा मंडी से जुड़े हैं। धान की आवक और लिफ्टिंग सुचारू है।
- अशोक शर्मा, मार्केट कमेटी सचिव घरौंडा
धान सस्ते दाम पर बेचने को मजबूर किसान
संवाद न्यूज एजेंसी
निसिंग। पीआर धान की आवक कम होती जा रही है। आगामी चार-पांच दिनों में पीआर किस्म की पछेती धान का खेतों से निपटान संभव है। किसानों का हजारों क्विंटल धान मंडी में पड़ा है। जिसकी उचित दामों में बिक्री नहीं होने से किसान परेशान हैं। व्यापारी धान में कमियां बताकर कम दामों में खरीदने का प्रयास करते हैं लेकिन मौसम से डरा किसान कम दामों में बेचने को मजबूर है।
मंडी में बहुत कम किसानों की ढेरियां सरकारी दामों में खरीद की गई। जिन किसानों की ढेरियां रविवार को हुई बारिश से पहले पहुंची थी। उन ढेरियों को खरीदने में व्यापारी दिलचस्पी नहीं दिखा रहा। खासकर जिस धान में थोड़ा हरा दाना था। वह धान दो दिन खरीद बंद रहने से काली पड़ गई। जिसे किसान मंडी में फैलाकर सूखाने का प्रयास कर रहे हैं ताकि उनकी धान सही दामों में बिक सके। लेकिन किसानों को खरीददार नहीं मिल रहे। यदि मिलते हैं तो कम दाम लगाए जाते हैं।
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मंडी में बीते सप्ताह की अपेक्षा धान के दाम 100 से 200 रुपये घटा दिए हैं। दो दिन से काटी गई धान पूरी पकी है, लेकिन बारिश के कारण नमी खत्म नहीं हो रही। किसान बूटा सिंह, गुलजार सिंह व सलिंद्र सिंह सहित अन्य का कहना था कि मंडी में पीआर धान घटने के साथ ही दामों में भी गिरावट कर दी गई है।
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