फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

42 डिग्री पहुंचा तापमान, धूप में निकला हुआ दुश्वार

विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

करनाल। जिले में सोमवार को अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भीषण गर्मी के चलते जनजीवन अस्तव्यस्त रहा। लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया। सड़कों पर आवाजाही बहुत कम नजर आई। गेहूं कटाई के सीजन में खेतों में सुबह 11 से शाम पांच बजे तक करीब छह घंटे कृषि कार्य प्रभावित रहे।
राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान के कृषि विज्ञान केंद्र स्थित कृषि मौसम सेवा इकाई के अनुसार राजस्थान के बाहरी क्षेत्रों से कम दबाव का क्षेत्र गुजर रहा है। पूर्वानुमान है कि इसके चलते मंगलवार रात से थोड़ी राहत मिलेगी। 13 व 14 अप्रैल को जिले में एक-दो जगहों पर अंधड़ व तेज हवाएं चलने का अनुमान है।
विज्ञापन

पिछले वर्ष की अपेक्षा 4.9 डिग्री अधिक रहा पारा
केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान के मौसम विभाग के अनुसार सोमवार को अधिकतम तापमान 42.0 व न्यूनतम 19.4 डिग्री सेल्सियस रहा। आर्र्दता सुबह 53 व दोपहर 11 प्रतिशत, वाष्प दाब 6.4 एमएम व हवा की औसत गति 1.1 किलोमीटर प्रति घंटा रही।
11 अप्रैल को पिछले वर्षों में ये रहा तापमान
वर्ष अधिकतम न्यूनतम
2014 33.0 15.5
2015 34.0 15.6
2016 37.5 18.2
2017 33.0 14.0
2018 35.0 18.8
2019 37.0 18.2
2020 36.2 16.1
2021 37.1 15.0
2022 42.0 19.4
इस बार गर्मी बढ़ने के ये हैं तीन कारण
राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान के कृषि विज्ञान केंद्र स्थित कृषि मौसम सेवा इकाई के विशेषज्ञ डॉ. योगेश कुमार ने बताया कि इस बार गर्मी बढ़ने के तीन प्रमुख कारण हैं।
- अक्तूबर से मार्च के बीच हर वर्ष दो से तीन पश्चिमी विक्षोभ आते थे, उसकी वजह से उत्तर भारत में मौसम अनुकूल बना रहता था। न्यूनतम व अधिकतम तापमान कम रहता था। हालांकि इस वर्ष भी ये पश्चिमी विक्षोभ आए लेकिन इनकी तीव्रता फरवरी के अंत तक रही। केवल पहाड़ी इलाके में इनका असर रहा। इस वजह से मैदानी क्षेत्र में बारिश नहीं हुई। हवा में नमी नहीं रही और तापमान में वृद्धि हुई।
- दूसरा कारण यह है कि राजस्थान के आसपास के क्षेत्रों के अंदर एक उच्च दबाव का क्षेत्र मध्य मार्च के बाद से विकसित हुआ। उसकी वजह से हवा में नमी कम रही और पश्चिमी विक्षोभ नहीं आए, जिससे तापमान औसत तापमान से अधिक दर्ज किए गए।
विज्ञापन

- तीसरा कारण यह रहा कि यदि पिछले वर्षों में देखा जाए तो फरवरी के अंत से अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक हर वर्ष हल्की बारिश, ओलावृष्टि व तेज हवाएं चलती थीं। बदलते जलवायु के कारण इस बार 10 से 15 दिन पहले गर्मी आई है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें