करनाल में राजस्थान के मूर्तिकार युवक पर दिवाली की रात चार बदमाशों ने चाकू से हमला कर 16 हजार रुपये लूट लिए। जख्मी हालत में युवक को कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज लाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। परिजनों ने अज्ञात हमलावरों पर लूट व हत्या के साथ ही मेडिकल कॉलेज प्रबंधन पर उपचार में लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि हमले में घायल होने के बाद मेडिकल कॉलेज में घंटों उपचार नहीं मिल पाने के कारण ही युवक की मौत हो गई। राजस्थान के पाली जिले के कई मूर्तिकार परिवार करनाल के सेक्टर-4 में झोपड़ी बनाकर रहते हैं।
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मां को लेने गए थे रेलवे स्टेशन
इसके साथ ही त्योहारों आदि पर देवी-देवताओं व महापुरुषों की मूर्तियां बनाकर उनकी बिक्री करके अपना जीवनयापन करते हैं। इन्हीं परिवारों में से संजय की घंटाघर पर मूर्तियों की दुकान है। दिवाली को लक्ष्मी, गणेश आदि की मूर्तियों की बिक्री के लिए दुकान लगाई थी। शाम को दुकान पर प्रकाश (21) पुत्र खेताराम, उसके साथ महेंद्र, संजय व किशन भी पहुंचे, ताकि सामान वापस घर लाया जा सके, लेकिन इसी बीच सूचना मिली कि संजय की मां ट्रेन से करनाल पहुंच रही है। संजय के साथ प्रकाश, महेंद्र, संजय व किशन चारों उन्हें लेने के लिए रेलवे स्टेशन चले गए।
अचानक युवकों ने किया हमला
वहां चारों बाहर की दुकानों के पास ट्रेन आने का इंतजार कर रहे थे। तभी वहां खड़े चार युवकों ने उन पर अचानक हमला बोल लिया। चाकू दिखाकर उनसे मारपीट की और उनकी जेब से मूर्ति बिक्री के 16 हजार रुपये लूट लिए। इस दौरान विरोध करने पर आरोपियों ने चाकू से प्रहार किए, जिससे प्रकाश गंभीर रूप से जख्मी हो गया। महेंद्र व संजय भी जख्मी हुए। गंभीर हालत में प्रकाश को कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज लाया गया। महेंद्र ने आरोप लगाया कि दिवाली की रात होने के कारण आपातकाल में कोई चिकित्सक नहीं था।
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आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज
घंटों प्रकाश वहां तड़पता रहा और खून बहता रहा। काफी देर बाद उपचार मिल सका। इस कारण उसकी मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि पुलिस को सूचना दी, लेकिन वह भी शाम को अस्पताल पहुंची, जिस कारण पोस्टमार्टम भी नहीं हो सका। इधर, सिविल लाइन थाना प्रभारी ने बताया कि चार अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
बीड़ी का बंडल लेते समय लुटेरों ने देख लिए थे रुपये
प्रकाश के साथी महेंद्र, किशन आदि का कहना है कि रेलवे स्टेशन के बाहर संजय ने दुकान से बीड़ी का बंडल लिया था। दुकानदार को खुले रुपये देने के लिए उसने जेब से सारे रुपये एक साथ बाहर निकाल लिए थे। उसमें से 10 रुपये का नोट निकालकर फिर सारे रुपये वापस जेब में रख लिए। शायद इसी दौरान वहां खड़े किसी लुटेरे की नजर उसके रुपयों पर पड़ गई थी। तभी आरोपियों ने रुपये के लालच में वारदात को अंजाम दे दिया।
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प्रकाशपर्व पर अंधेरी हो गई मंजू की जिंदगी
प्रकाश की शादी सात महीने पहले ही पाली गांव के निकट स्थित बाला गांव की मंजू से हुई थी। वह अपनी पत्नी मंजू को भी करनाल ले आया था। दोनों साथ ही रहते थे। मंजू भी मूर्तियां बनाने में मदद करती थी, लेकिन प्रकाशपर्व पर उसकी जिंदगी में हमेशा के लिए अंधेरा हो गया।