जलवायु परिवर्तन के दौर में कृषि विज्ञानी अब गेहूं की ऐसी किस्मों पर शोध कर रहे हैं जो सामान्य से अधिक तापमान को भी झेल सकें। भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक शोध के बाद गेहूं की 24 किस्मों में से ऐसी किस्मों की पहचान करेंगे। गेहूं की फसल के फुटाव के बाद अधिक उत्पादन के लिए अमूमन अत्यधिक सर्दी को अनुकूल माना जाता है। मगर वर्तमान जलवायु परिवर्तन के हालात को देखते हुए हर वर्ष ऐसा नहीं हो रहा है। इन चिंताओं के बीच खाद्य सुरक्षा कायम रखने के लिए यह शोध शुरू कर दिया गया है।
शोध में गेहूं में बालियां आने की प्रक्रिया के दौरान इस संरचना में बाहरी तापमान से पांच डिग्री अधिक तापमान बढ़ाकर उष्ण सहिष्णुता जांची जाएगी। ऐसी प्रजातियों की पहचान की जाएगी जो अधिक तापमान सहन कर सकें। ताप नियंत्रित फिनोटाइप सुविधा संरचना पूर्ण रूप से कंप्यूटर आधारित प्रणाली है। इसमें कंट्रोल पैनल लगे हैं। जब गेहूं की बालियों में दाने बनने की प्रक्रिया शुरू होगी, तब इस संरचना में पौधों पर तापमान के प्रभाव का विवरण दर्ज कर लिया जाएगा। जो 24 किस्में इस संरचना में लगाई गई हैं उन्हें बाहर खुले खेतों में भी लगाया गया है। संरचना के अंदर व बाहर सेंसर लगे हैं। संरचना में पानी के प्रसार के लिए फव्वारे व वातानुकूलित यंत्र इत्यादि उपकरण स्थापित किए गए हैं और वैज्ञानिक इसके अध्ययन में जुटे हैं।