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फीस में छूट तो कहीं किताबों में राहत, तीन साल पुरानी उपलब्धियां का भी ले रहे साथ

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नया शिक्षा सत्र शुरू होने से एक माह पहले ही निजी स्कूलों ने नए विद्यार्थियों को अपने स्कूल में लाने के लिए प्रलोभन देने शुरू कर दिए हैं। कोई फीस में छूट तो कोई किताबों की खरीद में राहत देने का दावा कर रहा है। वहीं तीन साल पुरानी उपलब्धियों को गिनवा स्कूल संचालक अभिभावकों को अपने स्कूल में बच्चों का दाखिला कराने के लिए प्रेरित कर दे रहे हैं, क्योंकि कोरोना के कारण पिछले वर्ष परिणाम भी बिना परीक्षा के जारी हुए और अन्य गतिविधियां भी नहीं हुईं।
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निजी स्कूलों की ओर से दाखिले के लिए स्कूलों के बाहर, बसों और अन्य स्थानों पर बोर्ड लगाने के अलावा सोशल मीडिया पर भी पोस्टर जारी किए जा रहे हैं। ताकि विद्यार्थी आवेदन करें और वे चालू शिक्षा सत्र के पूरा होने से पहले दाखिला कर सकें लेकिन अभिभावक दुविधा में हैं कि वे क्या करें, क्योंकि कोरोना के कारण दो साल से पढ़ाई भी ठीक ढंग से नहीं हो पाई। निजी स्कूलों द्वारा भी प्रलोभन देने का उद्देश्य भी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाना है, क्योंकि पिछले दो साल में निजी स्कूलों की छात्र संख्या लगातार गिरी है। शिक्षाविदों का कहना है कि छात्र संख्या ही स्कूलों की साख होती है। दोनों वर्षों में 2019 की तुलना में 20 प्रतिशत तक कम दाखिले हुए। वहीं सरकारी स्कूलों की छात्र संख्या में काफी इजाफा हुआ। सरकार की ओर से एक अप्रैल से नया सत्र शुरू करने की घोषणा की गई है। मार्च माह में सभी कक्षाओं की अंतिम एवं फाइनल परीक्षाएं भी आयोजित होनी हैं।
छात्रवृत्ति और फीस में 50 प्रतिशत तक छूट देने की योजना
जिले में सीबीएसई के 119 और हरियाणा बोर्ड के 270 से ज्यादा निजी स्कूल हैं। इनमें से कई स्कूलों ने फीस और किताबों में राहत देने के अलावा छात्रवृत्ति देने की योजना बनाई है। हर चौथा स्कूल इस तरह की योजना चला रहा है। स्कूलों की ओर से रविवार को परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है। इसमें अव्वल आने वालों को मेरिट के आधार पर वर्ष में छात्रवृत्ति दी जाएगी। ये छात्रवृत्ति भी केवल नया दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों के लिए ही रखी गई है। इसमें भी नकद राशि नहीं दी जाएगी और सालाना फीस एक साथ जमा कराने पर 30 से 50 प्रतिशत तक की छूट के रूप में इसमें समायोजित होगी।
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निजी छोड़कर सरकारी स्कूल में आए थे 22597 विद्यार्थी
2021-22 के शिक्षा सत्र में सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ी थी। पहली बार एक साथ जिले के 778 राजकीय स्कूलों में 22597 नए विद्यार्थी आए। 30 सितंबर तक दाखिला प्रक्रिया चली। इस दौरान पहली से 12वीं कक्षा तक 147606 विद्यार्थियों का दाखिला हुआ। जबकि 2020-21 में 125009 विद्यार्थी ही पढ़ रहे थे। इस बढ़ी छात्र संख्या में करनाल प्रदेश में चौथे और जीटी बेल्ट में पहले पायदान पर है।
अभिभावक बोले, कोरोना और महंगाई ने बिगाड़ दी आर्थिक स्थिति
लॉकडाउन के कारण आर्थिक तंगी के चलते बहुत से अभिभावकों ने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाने का फैसला लिया है। सदर बाजार के रितेश, सुभाष गेट के शंकर, सतीश और शिव कॉलोनी के भगवानदास ने बताया कि उनके बच्चे पहले निजी स्कूल में पढ़ते थे। लॉकडाउन में उनका रोजगार चला गया लेकिन स्कूल ने फीस नहीं छोड़ी। इसलिए बच्चों को आगे वहां न पढ़ा पाना मजबूरी रही और सरकारी स्कूल में दाखिला कराया। कोरोना के साथ महंगाई ने भी आर्थिक स्थिति को बिगाड़ दिया है।
चालू सत्र में निजी स्कूलों में
इतने विद्यार्थी कर रहे पढ़ाई
कक्षा निजी
पहली 5777
दूसरी 11482
तीसरी 13851
चौथी 14439
पांचवीं 14005
छठी 13556
सातवीं 13384
आठवीं 13460
नौवीं 11610
दसवीं 11762
11वीं 4853
12वीं 7916
कुल 136095
नोट : ये आंकड़े शिक्षा विभाग के रिकार्ड के अनुसार हैं।
अभी वर्तमान सत्र पर है फोकस
हमारा अभी वर्तमान सत्र पर फोकस है। नए दाखिलों की तैयारी परीक्षाओं के बाद की जाएगी। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की हर सुविधा का ध्यान रखा जा रहा है। स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम में भी पढ़ाई करा रहे हैं।
- रोहताश वर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से मान्यता भी मिली
मॉडल संस्कृति बने आठ सरकारी स्कूलों को सीबीएसई की मान्यता भी मिली है। शिक्षा के स्तर में भी सुधार आया है। फिलहाल बोर्ड परीक्षाओं में विद्यार्थियों के बेहतर प्रदर्शन को लेकर तैयारी में जुटे हैं। दाखिले भी सरकारी स्कूलों में बढ़े हैं।
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-राजपाल, जिला शिक्षा अधिकारी
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