माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। सोमवार रात मौसम की बेरुखी किसानों पर बरसी तो अन्नदाता के आंसू छलक पड़े। देर रात मौसम का मिजाज बदला तो रात 10:55 बजे बारिश शुरू हो गई। दिनभर लाइन में लगने के बाद कुछ किसान तो मंडियों के अंदर पहुंच गए लेकिन कई देर रात भी लाइनों में ही धान की ट्रालियां लेकर खड़े रहे। सिर्फ करनाल अनाज मंडी में ही सोमवार की आवक 54000 क्विंटल है। तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले की सभी 15 अनाज मंडियों में लाखों क्विंटल धान खुले में ही पड़ा है।
झमाझम बारिश ने धान के साथ-साथ किसानों के सपनों पर भी पानी फेर दिया है। किसानों ने किसी तरह धान को बचाने का प्रयास तो किया, जिसके पास जो संसाधन थे, उनसे धान को ढका लेकिन फिर भी हजारों क्विंटन धान भीगने से नहीं बचाया जा सका। इसमें नमी की मात्रा तो बढ़ेगी ही, साथ ही उसके खराब होने का भी खतरा है। जिससे किसानों को बड़े नुकसान की आशंका है।
मौसम के थपेड़े सहकर किसी तरह धान पैदा हुआ तो अब मौसम की मार पड़ रही है। अभी तक अनाज मंडियों में ठीक तरीके से खरीद शुरू नहीं हो पाई है। किसान किसी तरह अपनी फसल लेकर मंडियों में पहुंच रहा है। करनाल सहित जिले की सभी अनाज मंडियां धान से अटी हैं। बहुत सी ढेरियां खुले में पड़ी हैं। दिन में भी हल्की बारिश हुई थी, कई किसानों ने छोटे-छोटे तिरपाल आदि की व्यवस्था की थी लेकिन देर रात हुई झमाझम बारिश ने किसानों के होश फाख्ता कर दिए हैं। जिले की कई मंडियों में खुले में लगी ढेरियां भीग गई हैं, क्योंकि ढेरियों की रखवाली के लिए कुछ किसान ही वहां थे। उनके साथ आए लोग घरों को चले गए थे।
नमी बढ़ाए सरकार
मध्यरात्रि को करनाल अनाज मंडी में मौजूद दरड़ गांव के हरविंद्र सिंह, जोगेंद्र सिंह ने बताया कि जब मौसम बार-बार खराब हो रहा था तो जिला प्रशासन की ओर से भी धान को बचाने के लिए तिरपाल आदि की व्यवस्था की जानी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। यदि सरकार ने शीघ्र नमी का मानक बढ़ाया तो किसानों का यह धान बिकना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में किसान भारी नुकसान में चला जाएगा, कर्जमंद भी हो जाएगा। अब सरकार को बिना देरी किए नमीं का मानक बढ़ाना चाहिए।
-लगातार बारिश से पहले से ही धान में नमी अधिक हो रही है, जिससे कई तरह की दिक्कतें आ रही हैं। सोमवार रात झमाझम बारिश से जिलेभर की अनाज मंडियों में खुले में धान पड़ा रहा। सैकड़ों किसान तो लाइन में खड़े हैं, बारिश से उनके धान में भारी नुकसान की आशंका है। सरकार को तत्काल 23 से 24 प्रतिशत नमी पर धान खरीदने का एलान कर देना चाहिए।
- राजेंद्र आर्य दादूपुर राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय किसान मजदूर नौजवान यूनियन
- इस बार किसानों पर बड़ी आफत है, सरकार धान नहीं खरीद पा रही है। हजारों किसानों ने कई दिन पहले ही कटाई करा ली थी, उनके धान आज तक नहीं बिक सके हैं। अनाज मंडियों में पड़ा धान खराब होने लगा है। अब फिर बारिश हो गई है। यदि सरकार ने जो भी धान मंडियों में है, उसे बिना शर्त नहीं खरीदा तो किसान बर्बाद हो जाएगा।
- गुरमुख सिंह विर्क, राष्ट्रीय अध्यक्ष अन्नदाता भारतीय किसान यूनियन