करनाल। नगर निगम करनाल के हाउस की बैठक सेक्टर 12 स्थित नए कार्यालय में मंगलवार को सुबह 11 बजे से होगी। इसकी तैयारियां पूरी कर ली गई है। एजेंडे में 30 बिंदुओं को शामिल किया गया है लेकिन अभी भी कई ऐसे मुद्दे हैं, जो नगर विकास से सीधे जुड़े होने के बावजूद एजेंडे में उन्हें स्थान नहीं बना सके हैं। साढ़े छह महीने के बाद हो रही बैठक में ऐसे कुछ मुद्दों पर पार्षद सदन का ध्यानाकर्षण कर सकते हैं।
भले ही बैठक घोषित होने ही हंगामे की आशंका को देखते हुए नगर निगम ने स्ट्रीट लाइटें लगाने को लेकर सर्वे शुरू कराने की बात कही हो लेकिन पिछले तीन साल से शहर में एक भी नई स्ट्रीट लाइट न लगने का मामला सदन में गूंज सकता है। दूसरी ओर शहर में पिछले कार्य अभी तक पूर्ण नहीं हो सके हैं, कई चौपालें अधूरी हैं तो सीवरेज लाइनों का कार्य भी अधर में लटका हुआ है। शहरवासियों को आवारा पशु, कुत्ते और बंदर भी परेशान कर रहे हैं। टेंडर लगे लेकिन कार्य पूरा होने से पहले ही बंद हो गया। शहर के कई सरकारी स्कूलों के भवनों की हालत काफी खस्ता है। कई भवन तोड़े गए लेकिन दोबारा बनाए नहीं गए, जिससे बच्चों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के दौरान जलभराव भी समस्या है।
अधूरी पड़ी चौपाल भवनों का कार्य पूरा हो
शहर में नगर निगम की ओर से कई चौपालें बनाई गईं हैं। इनमें किसी भी समाज का व्यक्ति शादी या अन्य कार्यक्रमों को सस्ते में कर सकता हैं, लेकिन इनमें से कई चौपालें अधूरी पड़ी हैं। पार्षद बलविंदर सिंह ने बताया कि उनके वार्ड में ही चौपालें अधूरी पड़ी हैं। इनमें लाखों रुपये निगम का फंस भी गया लेकिन चौपाल किसी के काम भी नहीं आ रही हैं।
सरकारी स्कूलों की हालत सुधरनी चाहिए
भले ही सरकारी स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था का संचालन शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी हो लेकिन भवनों पर तो नगर निगम ध्यान दे ही सकता है। कई पार्षदों का कहना है कि कई स्कूल तो ऐसे हैं, जहां सालों पहले पुराने जर्जर भवन के कक्षों को तोड़ दिया गया लेकिन अभी तक नया नहीं बनवाया गया है। जैसे बागपति स्कूल, छोटी मंगलपुर, बुढाखेड़ा का प्राइमरी स्कूल आदि। यहां बच्चों के बैठने के लिए बेंच तक नहीं हैं। यहां बच्चों को काफी दिक्कत उठानी पड़ रही है।
सार्वजनिक शौचालय बनने चाहिए
-शहर में कुछ स्थानों पर सार्वजनिक शौचालय बनाए गए हैं लेकिन उनकी नियमित सफाई नहीं होने के कारण उनका लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। कुछ शौचालयों में पुरानी सीटों की साफ सफाई की बजाय बदल दिया गया। उनकी स्थिति ठीक नहीं है। वहीं सार्वजनिक स्थानों पर शौचालयों का अभाव दिखाई दे रहा है।
सीवरेज का कार्य आधूरा
-कई सालों से सीवरेज की पाइप लाइनों को बदलने का कार्य चल रहा है, लेकिन शहर में कई ऐसे स्थान हैं, जहां अभी भी सीवरेज की समस्या है। हालांकि निगम ने सुपर सकर मशीन, बकेट मशीन आदि ली हैं, स्थिति में सुधार भी हुआ है लेकिन अभी भी समस्या तो है।
कुत्ते व बंदरों से हो रही परेशानी
-शहर में कई बार कुत्ते और बंदरों को पकड़ने के लिए टेंडर लगाए गए। कुछ सस्थाओं ने कार्य भी शुरू किया लेकिन कुछ समय तक कार्य करने के बाद वह संस्थाएं कहां चली गई, शहर के लोगों को उनकी जानकारी नहीं है। कुत्ते व बंदर आज भी परेशानी का सबब बने हुए हैं।
जलभराव की समस्या
-हर साल बारिश के दौरान जलभराव की समस्या उत्पन्न हो जाती है। नगर निगम ने अब ड्रेन-एक की चौड़ाई बढ़ाने व साफ सफाई करने की योजना बनाई है, लेकिन अभी तक कार्य शुरू नहीं हो सका है।
वार्डवार पथप्रकाश के टेंडर लगाने की हो सकती है मांग
-शहर में 25 हजार स्ट्रीट लाइटों को स्मार्टसिटी का प्रोजेक्ट करोड़ों का है, इसलिए वह तीन साल से लगातार टलता आ रहा है। उप महापौर एडवोकेट नवीन कुमार ने बताया कि वह सदन में मांग रखेंगे कि यदि स्ट्रीट लाइट के टेंडर को वार्डवार कर दिया जाए तो निश्चित तौर पर यह सफल हो सकता है। तीन साल से शहर में कोई नई स्ट्रीट लाइट नहीं सकी है।
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-जो भी समस्याएं सामने आई हैं, उन्हें एजेंडे में शामिल कर लिया गया है, जिन्हें सदन में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। इसके अलावा भी जो भी सदन प्रस्ताव पारित करेगा, उसे भी इसमें शामिल करते हुए तेजी के साथ विकास कार्यों को कराया जाएगा।
-डॉ. मनोज कुमार, आयुक्त नगर निगम करनाल।