लघु सचिवालय की ओर मार्च करते किसान।
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महापंचायत में हजारों की संख्या में जुटे किसानों ने एक सुर में लाठीचार्ज में जान गंवाने वाले किसान सुशील काजल को न्याय दिलाने की मांग उठाई। मंच से किसानों ने मृतक सुशील को न सिर्फ शहीद का दर्जा दिया, बल्कि उसकी तस्वीर मंच पर रखकर श्रद्धा सुमन भी अर्पित किए। इस दौरान सुशील की पत्नी और बेटे भी महापंचायत में पहुंचे। उन्होंने भी किसान आंदोलन और न्याय के लिए लड़ते रहने का संकल्प लिया।
करनाल में 28 अगस्त को भाजपा के कार्यक्रम का विरोध करने पहुंचे किसानों पर लाठीचार्ज कर दिया गया था। इस दौरान घरौंडा क्षेत्र के रायपुर जटान गांव निवासी सुशील काजल को भी चोट आई थी। घर पहुंचने के बाद संदिग्ध परिस्थितियों में उसकी मौत हो गई। परिजनों के अनुसार सुशील काजल आरंभ से ही किसान आंदोलन से जुड़े हुए थे और लाठीचार्ज की घटना से काफी आहत थे।
यही कारण है कि सुशील की मौत के बाद अब किसान संगठन उन्हें शहीद का दर्जा दे रहे हैं और उनके परिजनों के लिए 25 लाख की आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी की मांग कर रहे हैं लेकिन प्रशासन ने किसानों की इस मांग को नामंजूर कर दिया है और मृतक किसान के बेटे को डीसी रेट पर नौकरी का आश्वासन दिया है, जो किसानों को मंजूर नहीं है। इसके अलावा किसान संगठनों की ओर से लाठीचार्ज के दोषी अफसरों के खिलाफ केस दर्ज करने और घायल किसानों को दो-दो लाख रुपये मुआवजे देने की मांग की गई है।
मंगलवार को किसान महापंचायत के दौरान तीन दौर की वार्ता के बाद भी मांगों पर सहमति नहीं बन सकी है। इससे पहले महापंचायत में मृतक किसान के बेटे और पत्नी को भी बुलाया गया था। साथ ही सभास्थल पर मृतक किसान की तस्वीर लगाई गई थी जिस पर हजारों की संख्या में किसानों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। विदित हो कि मृतक सुशील के एक बेटा और एक बेटी हैं। दोनों की शादी हो चुकी है। बेटा साहिल एमए पास है, जो मां और पत्नी के साथ गांव पर ही रहता है।