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खाद्य तेल में आत्मनिर्भर होगा भारत

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गेहूं उत्पादन में हम आत्मनिर्भर हैं और इस समय बड़े स्तर पर निर्यात भी किया जा रहा है। जल्द ही हम खाद्य तेल के मामले में भी आत्मनिर्भर बन जाएंगे। इसके लिए भारत सरकार की ओर से ‘ऑयल सीड मिशन’ चलाया जा रहा है। वर्तमान में रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग से भारत की चिंता बढ़ी है। ऐसे में अब खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता संबंधी मिशन को और मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। यह कहना है भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक एवं कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग के केंद्रीय सचिव डॉ. त्रिलोचन महापात्रा का। वे शनिवार को राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान करनाल में विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत करने पहुंचे थे।
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भारत सरकार की ओर से आयल सीड मिशन के बावजूद अभी देश में खाद्य तेल का आयात करीब 50 प्रतिशत है। इसमें से अधिकांश की आपूर्ति यूक्रेन और इंडोनेशिया जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों से होती रही है, लेकिन वर्तमान में रूस और यूक्रेन के बीच खिंच रही लंबी जंग ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। जानकार मानते हैं कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के हालातों के मद्देनजर भारत में खाद्य तेल का संकट हो सकता है। कारण कि सूरजमुखी उत्पादक देश रूस और यूक्रेन से किसी भी रूप में आयात संभव नहीं लग रहा। वहीं इंडोनेशिया ने घरेलू जरूरत की पूर्ति के लिए पॉम ऑयल (ताड़ का तेल) का निर्यात अनिश्चित काल के लिए बंद करने का फैसला लिया है। यही कारण है कि केंद्र सरकार की ओर से ऑयल सीड मिशन को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत बाहर से आयात होने वाले सूर्यमुखी, सोयाबीन और पाम आयल तेल उत्पादन पर जोर दिया जाएगा। विदित हो कि पॉम ऑयल का इस्तेमाल चॉकलेट, केक, शैंपू, साबुन और कास्मेटिक इत्यादि को तैयार करने के लिए किया जाता है। भारत भी इंडोनेशिया से पॉम ऑयल का आयात करता है। ऐसी परिस्थिति में अपने देश में खाद्य तेल उत्पादन बढ़ाने की संभावनाएं तलाशनी जरूरी हो गई है।
दुग्ध उत्पादन में हम नंबर वन पर निर्यात में पीछे
उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादन में भारत नंबर वन है, लेकिन इसके बावजूद दुग्ध उत्पादों का निर्यात न कर पाना चिंता का विषय है। इसके लिए विदेशों के खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता के मापदंडों पर खरा उतरना होगा। साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार का गहनता से अध्ययन कर उसके लिए खुद को तैयार करना होगा।
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भारत में खाद्य तेल की उपलब्धता का आंकड़ा ----
- देश में कुल तिलहनी फसलों का रकबा 25 मिलियन हेक्टेयर
- कुल खाने योग्य तेल का उत्पादन 32 मिलियन टन
- प्रतिवर्ष कुल आयत तेल की मात्रा 15 मिलियन टन, जिसकी अनुमानित लागत करीब 7300 करोड़ (वर्ष 2019)
- आयात होने वाले तेल में 62 प्रतिशत भाग पॉम ऑयल का है, जिसके मुख्य उत्पादक देश इंडोनेशिया व मलेशिया हैं
- 21 प्रतिशत भाग सोया ऑयल का है जिसके मुख्य उत्पादक देश अर्जेंटीना और ब्राजील हैं
- 16 प्रतिशत भाग सूरजमुखी के तेल का है जिसके मुख्य उत्पादक देश यूक्रेन और अर्जेंटीना हैं।
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