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तीन साल में 153 लोगों की अर्थी को नसीब नहीं हुआ अपनों का कंधा

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राकेश चौहान
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करनाल। सभी लोग चाहते हैं कि मरने के बाद उनका अंतिम संस्कार व अंतिम क्रिया उनके परिवार वाले करें लेकिन जिले में पिछले तीन साल में 153 ऐसे लोग हैं, जिनके मरने के बाद उनकी अर्थी को अपनों का कंधा नसीब नहीं हो सका। यही नहीं वे कौन थे, यहां क्या करने आए थे किसी को कुछ पता नहीं है। उनके परिजनों को तक यह जानकारी नहीं है कि वे अब इस दुनिया में नहीं हैं। वे अब भी इन्हें तलाश रहे और उनके सकुशल घर लौट आने का इंतजार कर रहे हैं।
पुलिस की भी यह असफलता ही है, जो मृतकों के अपनों को तलाश नहीं सकी। हालांकि पुलिस दावा करती है कि वह हर संभव प्रयास करती है कि अज्ञात मृतक की पहचान कर उनके परिजनों को सूचना दें लेकिन जिले में 153 अज्ञात व्यक्ति हैं, जिनकी मौत हुई है। पुलिस उनकी पहचान नहीं कर पाई। संवाद
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72 घंटे बाद किया जाता पोस्टमार्टम
पुलिस के अनुसार अज्ञात व्यक्ति का शव मिलने पर 72 घंटे तक पहचान के लिए शव गृह में रखा जाता है। इसके बाद पोस्टमार्टम करा शव जनसेवा दल को सौंपा जाता है। उसी संस्था द्वारा अंतिम संस्कार किया जाता है। अज्ञात व्यक्ति का शव मिलने पर पहले पुलिस शव का फार्म भरकर एसपी कार्यालय भेजती है। जिसमें मृतक के शरीर, कपड़े आदि की जानकारी भरी जाती है। इसके बाद एसपी ऑफिस में न्यूनीफाई पुलिस पोर्टल पर मृतक का चेहरा मिलाया जाता है, क्योंकि इस पोर्टल पर सभी लापता लोगों की तस्वीरें होती हैं, जिनकी देश के पुलिस थानों में लापता की जानकारी होती है। वहीं जीपनेट एक और पुलिस पोर्टल है जहां पर मृतकों के शरीर, कपड़े की जानकारी दर्ज होती है। इससे पोर्टल पर भी मृतक की पहचान करने का प्रयास किया जाता है।
पुराने तरीके अपना रही पुलिस
पुलिस पोर्टल पर भी पहचान न हो तो जांच अधिकारी सिटी केबल चैनल, अखबार में सूचना और इश्तहार छपवाते हैं। आसपास के जिलों में भी पूछताछ करते हैं। 72 घंटे बाद मृतक का पोस्टमार्टम करा दिया जाता है। मृतक के कपड़े व अन्य सामान पहचान के लिए रिकॉर्ड में रख लिए जाते हैं। मृतक के फिंगर प्रिंट भी फोरेंसिक लैब में भेजे जाते हैं। डीएनए के लिए हड्डी भी रखी जाती है, उसके बाद भी मृतक की शिनाख्त नहीं हो पाती।
विशेषज्ञ की राय
डीएनए डाटा बैंक बनाया जाए : एडवोकेट
वकील हरीश आर्य ने बताया कि पुलिस के पास जो संसाधन हैं उनके जरिए वह प्रयास करती है फिर भी अज्ञात मृतकों की पहचान नहीं हो पाती। इसके लिए डीएनए डाटा बैंक बनाया जाए। उसमें सरकार द्वारा देश के हर व्यक्ति के डीएनए का डाटा रखा जाए। इससे तुरंत अज्ञात व्यक्ति की पहचान हो जाएगी और कई समस्याओं का समाधान हो जाएगा। जो अनजान लोग भीख मांगते हैं उनकी भी पहचान हो जाएगी। कई देशों में यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
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मृत मिले अज्ञात व्यक्ति के शव को 72 घंटे के लिए शव गृह में रखा जाता है। इसके बाद पोस्टमार्टम कराया जाता है। इस दौरान पुलिस पूरे प्रयास करती है ताकि मृतक की पहचान हो सके। 72 घंटे के बाद ही शव का पोस्टमार्टम कराया जाता है। इसके बाद भी पुलिस मृतक की पहचान के लिए प्रयासरत रहती है।
गंगाराम पूनिया, एसपी करनाल
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