संवाद न्यूज एजेंसी
कुंजपुरा/करनाल। मुगल माजरा-नेवल रोड पर चमड़ा फैक्टरी में रविवार को हौद की सफाई करते समय जहरीली गैस चढ़ने से तीन मजदूरों की मौत हो गई थी, वहीं तीन मजदूर बेहोश हो गए थे जिनका अस्पताल में उपचार चल रहा है। इन तीनों श्रमिकों की हालत सामान्य हो रही है। इन श्रमिकों का कहना था कि यदि समय पर उन्हें मदद मिल जाती तो उनके तीन साथियों की जान नहीं जाती।
होश आने के बाद 44 वर्षीय श्रमिक भीम बहादुर ने बताया कि जब उसे पता चला कि पवन, सतीश व राजू हौद में बेहोश पड़े हैं तो उनकी जान बचाने के लिए सबसे पहले वह हौद में उतरा था, लेकिन जहरीली गैस के कारण उसे भी चक्कर आने लगे। उसके बाद सूरज ने हौद में उतर कर उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन वह भी उसी की तरह उसके पास गिर पड़ा।
इसी क्रम में मौसम भी खुद सीढ़ी से नीचे उतरा तो उसे भी बेहोशी छाने लगी, वह तुरंत खुद को संभालते हुए ऊपर भाग आया, लेकिन ऊपर आते वह भी जहरीली गैस के असर से बेसुध होकर गिर गया। भीम बहादुर ने बताया किया कि एक घंटे तक हौद में सभी बेहोशी की हालत में पड़े रहे, लेकिन उन्हें संभालने न तो सुपरवाइजर, न फैक्टरी मालिक मौके पर पहुंचा। समय पर उपचार मिल जाता तो पवन ठाकुर, राजू व सतीश की जान बचाई जा सकती थी। मृतक पवन के चचेरे भाई अमित ने बताया कि दो दिन से उन्हें खाना तक नसीब नहीं हो सका। फैक्टरी मालिक व सुपरवाइजर के रवैये से मृतकों के परिजन आक्रोशित हैं। उनका कहना हैं कि इतनी बड़ी घटना हो गई, लेकिन किसी ने अब तक उनकी सुध नहीं ली। इस बीच तीनों शवों के पोस्टमार्टम करा दोपहर करीब 12:30 बजे मृतकों के परिजनों के हवाले कर दिए गए, जिन्हें वे एंबुलेंस से गंतव्य की ओर रवाना हो गए।
बेसुध होकर गिरी बहन
सोमवार को तीनों श्रमिकों के पोस्टमार्टम के दौरान मेडिकल कॉलेज में मृतकों के परिजन और अन्य श्रमिकों ने फैक्टरी मालिक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि इस तरह की संवेदनशील फैक्टरियों में सुरक्षा के संसाधनों की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। श्रमिकों से काम तो पूरा लिया जाता है, लेकिन उनकी जान के जोखिम को भांपते हुए वांछित सुरक्षा की व्यवस्था नहीं की जाती। उन्होंने संजय लेदर फैक्टरी पर ताला लगाने की चेतावनी दी। इस दौरान पवन की बहन रोते हुए बेसुध भी हुई। गांव डबरी के निवर्तमान सरपंच गुरनाम सिंह लाडी व अन्य लोगों के समझाने पर श्रमिक और उनके परिजन शांत हुए।
जहरीली गैस बनी मौत का कारण
शवों का पोस्टमार्टम करने के बाद डॉक्टर नीतिका भटनागर ने बताया कि प्रथम दृष्टया जहरीली गैस से दम घुटने के कारण तीनों श्रमिकों की मौत हुई लगती है। गैस चढ़ने से पहले उनके फेफड़ों पर गैस का प्रतिकूल असर होने से वह बेहोश हो गए। तीनों शवों का विसरा प्रयोगशाला भेज दिया गया। रिपोर्ट आने के बाद पूरी तरह स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
नहीं मिला कफन तो पुलिस बनी मददगार
कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में तीनों श्रमिकों के पोस्टमार्टम के बाद मृतक पवन ठाकुर को कफन का कपड़ा भी नसीब नहीं हो पाया। कुंजपुरा थाना प्रभारी विनोद कुमार ने जब यह स्थिति देखी तो उन्होंने तुरंत जांच अधिकारी एएसआई राकेश कुमार को बाजार से कपड़ा खरीद कर लाने को कहा। इसके बाद पवन को कफन नसीब हो सका। मोर्चरी हाउस में मौजूद एक स्वास्थ्य कर्मी ने बताया कि तीन-चार माह पूर्व सफेद कपडे़ की उचित व्यवस्था के लिए रिक्वायरमेंट का आधिकारिक पत्र अधिकारियों को भेजा जा चुका है।
मामले की गहनता से जांच की जा रही है। श्रमिकों के हाजिरी रजिस्टर सहित यह पता लगाया जाएगा कि श्रमिक स्थायी थे या अस्थायी। पिछले कितने दिनों से फैक्टरी में कार्य कर रहे थे। इसके अलावा फैक्टरी प्रबंधन द्वारा उनका ईएसआई फंड भी काटा जाता था या नहीं। साथ ही फैक्टरी मालिक की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
हिमाद्री कौशिक, एएसपी, करनाल