दौर बदल गए, जमाने बदल गए, मगर किसान आज भी अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में धरने, प्रदर्शन, सड़क जाम इत्यादि विरोध संबंधी तरीकों के साथ आंदोलनों में जुटा है। किसानों के कुछ आंदोलन उनके सूबे से संबंधित स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित होते हैं या फिर राष्ट्रीय मुद्दों पर आधारित। 07 सितंबर की किसान महापंचायत के बाद करनाल का ये आंदोलन भी स्थानीय मुद्दों पर ही आधारित था। जिसमें किसानों को जीत भी हासिल हुई।
इसी आंदोलन में कुछ बुजुर्ग ऐसे भी थे, जिन्होंने बाबा महेंद्र सिंह टिकैत के साथ कई आंदोलनों में हिस्सा लिया था। ये बुजुर्ग करनाल के किसान आंदोलन में भी शिद्दत के साथ जुटे रहे। पांच दिन तक लघु सचिवालय के बाहर चले धरना-प्रदर्शन में टेंट के नीचे बैठकर व रात भी यहीं गुजारकर इन बुजुर्ग किसानों ने अपनी तरफ से आंदोलन को मजबूती देने का प्रयास किया। अमर उजाला से बातचीत में इन किसान नेताओं ने बाबा टिकैत के दौर के आंदोलनों के संस्मरणों को भी साझा किया।
असंध के गांव पाई भान से आए 75 वर्षीय किसान कलतार सिंह बताते हैं कि उन्होंने बाबा टिकैत के साथ कई आंदोलनों में कई दिनों तक हिस्सा लिया है। उस वक्त सभी किसान अपनी-अपनी बैल गाड़ियों में आते थे। राशन साथ होता था और रात गुजारनेे के लिए बिछौना भी। न ट्रैक्टर होते थे, न टेंट व पंडाल और न ही खानपान की बहुत ज्यादा अच्छी व्यवस्था। सूचना क्रांति के अभाव में भी किसानों की भीड़ जुटाने के लिए लंबा समय लगता था। इससे आंदोलन भी लंबे खिंचते थे। आंदोलन खुले आसमान के नीचे होते थे और सभी किसान जो राशन घर से लाते थे, वही इकट्ठा कर आपस में बनाते और खाते थे। समय काटने के लिए हुक्का साथ होता था। किसान की पहचान दोसंगा (जेली) भी साथ होती थी। लेकिन आज ताक किसान हुक्का और दोसंगा पकड़ने में ही शर्म महसूस करते हैं।
बाबा टिकैत आंदोलन के दौरान पूरे किसानों में जोश भरकर रखते थे। किसी अन्य राज्य में जाना होता था तो ट्रेन में सभी किसानों को निशुल्क लेकर जाते थे। किसान के सिर पर सफेद और हरी टोपी देखकर ट्रेन में कोई टिकट के बारे में नहीं पूछता था। बुजुर्ग किसान बलवान सिंह व पूड़री ब्लाक के राजाराम बताते हैं कि आज आंदोलनों की परंपरा बदली है। सुविधाएं भले ही बढ़ गईं हैं, लेकिन बाबा टिकैत के समय के आंदोलनों की बात ही कुछ और होती थी। इन बुजुर्ग किसानों को विश्वास है कि करनाल की तरह केंद्र सरकार भी नवंबर 2020 से दिल्ली सीमाओं पर बैठे किसानों की मांगे मानकर उनका धरना भी खुलवाएगी।