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ज्यादा दिन न रखें पिसा आटा, घटेगा स्वाद, पाचन पर पड़ेगा प्रभाव

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फोटो-201
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ज्यादा दिन न रखें पिसा आटा, घटेगा स्वाद, पाचन पर पड़ेगा प्रभाव
वैैज्ञानिक बोले, औसत तापमान 15 डिग्री से ज्यादा हो तो आटे के भंडारण का कम होता जाएगा समय, कम होते जाएंगे विटामिन
कर्मबीर लाठर
करनाल। अगर पिसा हुआ आटा ज्यादा दिन तक घर में रखने के बाद आप इस्तेमाल करते हैं तो सचेत हो जाएं, क्योंकि इस आटे का स्वाद कम होने के साथ-साथ यह पाचन क्रिया पर भी असर डाल सकता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि गेहूं की पिसाई के बाद आटे के भंडारण और चपाती बनाने तक कई स्थितियों में संवेदनशीलता बनी रहती है। यदि औसत तापमान 15 डिग्री सेंटीग्रेड से ज्यादा हो तो आटे के भंडारण का समय कम होता जाएगा। एक महीने बाद ऐसे आटे में विटामिन कम होते जाएंगे और फैटी एसिड खराब हो जाते हैं।
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भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख अन्वेषक गेहूं गुणवत्ता विभाग डॉ. सेवा राम ने बताया कि अधिक तापमान में आटे के रंग में तबदीली के साथ रोटी के स्वाद में फर्क आ जाता है। ऐसा आटा इस्तेमाल करने से शरीर में पाचन क्रिया पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना रहेगी। यदि आटे में नमी 12 प्रतिशत से कम और औसत तापमान 15 डिग्री सेंटीग्रेड से कम है तो आटा 40 से 50 दिन तक भी इस्तेमाल कर सकते हैं। नमी ज्यादा होने पर फंफूद लग जाएगी और कीड़े भी पैदा हो सकते हैं। संवाद
आर्र्दता और तापमान का महत्व
डॉ. सेवा राम ने बताया कि आटे को घर में भंडारण करते समय खुला न रखें और हवा नहीं लगनी चाहिए। हवा में नमी होती है जिस कारण आटे में फंफूद व नमी बढ़ जाएगी। गेहूं के आटे का भंडारण करते समय तापमान व आर्द्रता दो मुख्य पहलू ध्यान देने योग्य हैं। अधिक समय तक भंडारण करते हैं तो उसमें ऐसी क्रियाएं होती हैं जिनसे विटामिन का नुकसान होने लगता है। कम तापमान वाली जगह पर आटे को रखते हैं तो विटामिन का कम नुकसान होगा और औसत तापमान 15 डिग्री हो तो सही रहेगा। आटे में नमी की मात्रा 12 प्रतिशत से कम रहनी चाहिए।
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गेहूं में पाए जाने वाले मुख्य पोषक तत्व
- प्रोटीन की मात्रा 10 से 13 प्रतिशत तक, औसत करीब 11.5 से 12 प्रतिशत।
- लौह तत्व 35 से 40 (पीपीएम-पार्ट्स पर मिलियन) मिलीग्राम प्रति किलो।
- जस्ता 35 से 40 पीपीएम।
- कैल्शियम करीब 300 मिलीग्राम प्रति किलो।
- मैग्निशियम करीब 1.4 ग्राम प्रति किलो।
- पोटाशियम करीब 3 ग्राम प्रति किलो।
- विटामिन-ई करीब 40 पीपीएम।
- विटामिन-बी में रिबोफ्लेमिन 1.7 पीपीएम प्रति किलो तथा थाईमीन करीब 4 पीपीएम प्रति किलो।
- विटामिन बी-6 करीब 10 से 12 पीपीएम।
दाने के छिलक में 80 प्रतिशत ताकत
डॉ. सेवाराम ने बताया कि गेहूं के दाने में पोषक तत्व व विटामिन की 70 से 80 प्रतिशत तक मात्रा छिलक वाले भाग में होती है। जबकि दाने के अंदर वाले भाग में ये सभी तत्व 20 से 30 प्रतिशत रह जाते हैं। गेहूं के छिलक समेत पूरे गेहूं का आटा बनाकर सेवन करना चाहिए। यदि बाजार से आटा लेते हैं तो उसकी भी जांच कर लें। चक्की वाला आटा सबसे उत्तम होता है।
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