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24 हजार प्रॉपर्टी के मालिकों को ढूंढने में जुटा नगर परिषद

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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। शहर में 24 हजार ऐसी प्रॉपर्टी हैं, जिनके मालिकों के नाम का पुराने प्रॉपर्टी सर्वे के साथ मिलान नहीं हो पा रहा है। इस कारण इन प्रॉपर्टी के लिए नगर परिषद की ओर से प्रॉपर्टी टैक्स के नोटिस नहीं दिए जा पा रहे हैं। लंबे समय से यह प्रक्रिया चल रही है, लेकिन अब आगामी तीन दिनों में इन प्रॉपर्टी का सर्वे करके रिपोर्ट देने के लिए 16 टीमों का गठन किया गया है। सोमवार 28 मार्च को विभाग मुख्यालय में डीएमसी स्तर के अधिकारियों की बैठक से पहले इन प्रॉपर्टी के मालिकों को ढूंढने की जिम्मेदारी नवगठित टीमों को दी गई है।
विदित रहे कि निजी एजेंसी द्वारा शहर में सभी प्रकार की प्रॉपर्टी का सर्वे किया गया है। इसमें से लगभग 24 हजार ऐसी प्रॉपर्टी हैं जिनके मालिकों के बारे में सर्वे एजेंसी को जानकारी नहीं मिल पा रही है। लगभग 75 हजार प्रॉपर्टी आईडी में से निजी एजेंसी द्वारा प्रॉपर्टी का सर्वे करके 49 हजार 414 को नोटिस भेजे जा चुके हैं। इन नोटिसों पर लोगों से अपनी प्रॉपर्टी के संबंध में आवश्यक जांच पड़ताल करने के लिए समय दिया गया है। दूसरी ओर 24 हजार प्रॉपर्टी आईडी के बारे में नोटिस जारी करने को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। नगर परिषद अधिकारियों के सामने समस्या यह है कि इन प्रॉपर्टी के लिए सर्वे नोटिस किसे दिया जाए। भविष्य में किस से इन प्रॉपर्टी पर टैक्स लिया जाएगा। इसी समस्या के समाधान के लिए अब इन प्रॉपर्टी के पुराने और नए सर्वे में मिलान के लिए 16 टीमों का गठन किया गया है। साथ ही 28 मार्च तक लंबित प्रॉपर्टी आईडी सर्वे का काम पूरा करने का निर्देश दिया गया है। 28 मार्च को ही डीएमसी की विभाग मुख्यालय स्तर पर बैठक है, जिसमें इस संबंध में हुई कार्रवाई की जानकारी दी जानी है। ये टीमें मौके पर जाकर प्रॉपर्टी का फोटो ले रही हैं। साथ ही मालिक के मोबाइल नंबर लेते हुए ऑनलाइन विवरण दर्ज किया जा रहा है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
ईओ कुलदीप मलिक ने कहा कि शहर में लगभग 75 हजार प्रॉपर्टी आईडी सामने आई हैं, जिनमें से 70 प्रतिशत से अधिक का सर्वे हो चुका है। लगभग 24 हजार प्रॉपर्टी ऐसी हैं, जिनका पिछले सर्वे के साथ मिलान नहीं हो पा रहा है। इसी समस्या के समाधान के लिए 16 सदस्यीय टीम का गठन किया गया है, जो जल्द रिपोर्ट देगी। प्रयास किया जा रहा है कि नगर परिषद की आय बढ़े ताकि शहर में विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके।
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