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बीआईएस का हालमार्किंग सेंटर पर छापा

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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) की टीम ने वीरवार को शहर के एक हॉलमॉर्किंग सेंटर पर छापा मारकर यहां बिना वैधानिक मान्यता के स्वर्ण एवं रजत आभूषणों पर फर्म कर्मियों द्वारा हॉलमार्क़िग करने का मामला पकड़ा है। यहां पर हॉलमार्क लगाने वाली लेजर मशीन, सीपीयू व अन्य दस्तावेजों को जब्त कर लिया है। सेंटर संचालक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है। छापा मारे जाने की सूचना से सराफा कारोबारियों में खलबली मच गई है। ब्यूरो अफसरों के मुताबिक बिना वैधानिक अनुमति के आभूषणों पर की गई आईएसआई आदि की हॉलमार्किंग को फर्जी माना जाएगा।
भारतीय मानक ब्यूरो हरियाणा के वैज्ञानिक ई व एचआरबीओ प्रमुख डीके सिंगला ने बताया कि सूचना मिल रही थी कि करनाल शहर में स्वर्ण एवं रजत आभूषणों पर फर्जी तरीके से हॉलमार्किंग की जा रही है। जिससे स्वर्ण आभूषणों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। जिसका सीधा नुकसान स्वर्ण आभूषण खरीदने वाले लोगों को हो सकता है। सूचना के आधार पर भारतीय मानक ब्यूरो चंडीगढ़ की हरियाणा शाखा के अधिकारियों ने वैज्ञानिक डी दीपक कुमार मुखीजा के नेतृत्व में करनाल के चौड़ा बाजार स्थित मैसर्स श्री जी हॉलमार्किंग सेंटर पर छापा मारा। यहां पर बिना बीआईएस की मान्यता लिए ही स्वर्ण एवं रजत आभूषणों पर हॉलमार्किंग करते पकड़ा गया है।
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मौके पर लेजर मशीन, सीपीयू व अन्य दस्तावेजों को जब्त कर लिया है। फर्म के खिलाफ यह भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम 2016 के तहत कार्रवाई शुरू की जा रही है, सक्षम न्यायालय में मुकदमा दायर किया जाएगा। क्योंकि ऐसा करना बीआईएस अधिनियम की धारा 14 व 15 का उल्लंघन है। इसमें एक साल तक का कारावास या कम से कम एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
बिना हालॅमार्किंग के आभूषण बिक्री पर प्रतिबंध
देश में 256 जिलों में जीएसटी पंजीकृत यानी 40 लाख से ऊपर टर्नओवर वाले सराफा व्यापारियों पर बिना हालॅमार्किंग के स्वर्ण व रजत आभूषण विक्रय पर प्रतिबंध है, हॉलमार्किंग करना अनिवार्य है। बिना बीआईएस से मान्यता लिए वह कारोबार नहीं कर सकते हैं। हरियाणा के लगभग 16 जिले शामिल हैं, इसमें करनाल, अंबाला, यमुनानगर व कैथल भी शामिल हैं।
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ऐसे करें पहचान
सोना हो या फिर चांदी, अधिकांशत: आम उपभोक्ता खरीदते समय भी यह नहीं समझ पाता कि जो आभूषण वह खरीद रहा है, उसकी गुणवत्ता क्या है। उसमें कितने प्रतिशत चांदी या सोना है और कितनी मिलावट की गई है। सराफ जो कहता है, उसे मानना मजबूरी होती है। इसे देखते हुए बीआईएस पोर्टल व बीआईएस केयर एप भी जारी किया गया है। इसके अलावा बीआईएस की वेबसाइट www.bis.gov.in पर जाकर आईएसआई मार्क की असलियत का पता लगाया जा सकता है।
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