करनाल (असंध)। राज्य की सहकारी चीनी मिलों का मुनाफा बढ़ाने के लिए सरकार चीनी उत्पादन के अलावा बहुद्देश्यीय योजनाओं पर काम कर रही है। इसी कड़ी में असंध के फफड़ाना गांव स्थित हैफेड चीनी मिल में बायो सीएनजी उत्पादन इकाई स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है। गोबर गैस प्लांट की तर्ज पर बायो सीएनजी बनाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। गन्ने की खोई, प्रेस मड व धान की पराली में पानी डालकर उसे सड़ाया जाएगा। उससे जो गैस बनेगी उसे कंप्रेशर के जरिए सिलिंडर में भरकर बेचा जाएगा। गैस बनाने के बाद जो अवशेष बचेगा उसे खाद के रूप में बेचा जा सकेगा।
हैफेड चीनी मिल के पास इस वर्ष गन्ना क्षेत्रफल करीब 15 हजार एकड़ है। मिल की पेराई क्षमता 25 हजार क्विंटल गन्ना प्रतिदिन है। 12 नवंबर को मिल का पेराई सत्र शुरू हो चुका है। चालू सत्र में करीब 40 लाख क्विंटल गन्ना पेराई का लक्ष्य है। गन्ने से अतिरिक्त उत्पाद बनाने पर न केवल मिल की आमदनी में इजाफा होगा बल्कि क्षेत्र के गन्ना उत्पादक किसानों को भी फायदा होगा। गन्ने की मांग बढ़ने के साथ इसका क्षेत्रफल बढ़ाना पड़ेगा और ज्यादा से ज्यादा किसान लाभान्वित हो सकेंगे।
घाटे से उबारने के प्रयास
राज्य के सहकारिता मंत्री डॉ. बनवारी लाल ने आठ नवंबर को मेरठ रोड स्थित सहकारी चीनी मिल के पेराई सत्र उद्घाटन समारोह में कहा था कि चीनी मिलें लंबे समय से घाटे में हैं। इन्हें घाटे से निकालने के लिए राज्य सरकार प्रयास कर रही है। पिछले साल तीन चीनी मिलों में गुड़-शक्कर बनाने पर काम किया गया था। करनाल की चीनी मिल में रिफाइंड चीनी का उत्पादन शुरू करने के साथ विद्युत उत्पादन संयंत्र लगाया गया है। शाहबाद में 99 करोड़ रुपये की लागत से एथेनॉल इकाई शुरू कर दी गई है।
प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय के बाद होगा अनुबंध
दिल्ली की नैफेड एजेंसी व ग्रीन एनवायरोटेक कंपनी के साथ मिलकर बायो सीएनजी प्लांट लगाने का प्रस्ताव रखा है। नियम व शर्तें अभी शेष हैं। यह पीपीपी मोड पर होगा। दूसरा नेशनल फेडरेशन ऑफ को-ऑपरेटिव शुगर फैक्टरी दिल्ली ने भी प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाकर दी है। इन दोनों प्रस्तावों में से जिस पर भी अंतिम निर्णय लिया जाएगा, उसके साथ अनुबंध करके इकाई स्थापित करने पर काम शुरू हो जाएगा। हैफेड प्रबंधन ने यह इकाई स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसकी प्रक्रिया चल रही है।
- सैय्यद जफर अली, अतिरिक्त महाप्रबंधक, हैफेड चीनी मिल।