जून के अंतिम सप्ताह में मानसून की दस्तक किसानों के लिए वरदान से कम नहीं है। सावन शुरू होने से पहले आई इस बारिश से धान की फसल के लिए पानी की जरूरत पूरी हो ही रही है, साथ ही गन्ने की फसल पर अमृत बनकर गिर रही है।
क्योंकि इन दिनों गन्ने कल्ले निकलने और बढ़वार की स्थिति में है। हालांकि खेतों में तैयार हो रही मूंग पर जरूर किसानों को ध्यान देना होगा। मूंग वाले खेत में किसानों को पानी की निकासी की उचित व्यवस्था करनी होगी।
पिछले पांच दिनों से थोड़ी बहुत रोजाना बारिश हो रही है। रोपाई का कार्य लगभग पूरा होने वाला है, कुछ ही किसान शेष हैं, जो धान की रोपाई कर रहे हैं। धान की फसल में रोपाई के तत्काल बाद से ही खेतों में पानी की अत्यधिक आवश्यकता होती है।
राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल के जिला कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार सारस्वत ने बताया कि ये बारिश धान की फसल के लिए बेहद फायदेमंद है, इससे किसानों का सिंचाई खर्च भी बचेगा। जिन खेतों में धान की रोपाई हो गई है, जो किसान अभी रोपाई कर रहे हैं, उनके लिए भी लाभप्रद है।
खेतों में मूंग की फसल को जलभराव से नुकसान हो सकता है। यदि जलभराव रहेगा तो मूंग में फूल प्रभावित होगा, जिसका असर उत्पादन पर भी पड़ सकता है। इसलिए किसानों को चाहिए कि वह खेत में जलनिकासी की उचित व्यवस्था रखें, खेत में पानी भरा न रहने दें।
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के क्षेत्रीय केंद्र करनाल के निदेशक डॉ. राम निवास यादव ने बताया कि इन दिनों अरहर की बिजाई चल रही है। किसानों को पूसा-16, पूसा 2001, पूसा 2002 आदि किस्मों के बीजों को बोने की सलाह दी गई है, लेकिन बारिश शुरू हो गई है, इसमें किसानों को ध्यान रखना होगा। खेतों में जो अरहर उग आई है, उसे तो बारिश से कोई नुकसान नहीं होगा लेकिन जो पिछले दो तीन दिन में बोई गई है, उसका जमाव प्रभावित हो सकता है। इसलिए किसानों को ध्यान रखना होगा कि अधिक समय तक खेतों में पानी न भरा रहे। उसकी निकासी कर देनी चाहिए।
क्षेत्रीय गन्ना अनुसंधान संस्थान करनाल के अध्यक्ष डॉ. एमएल छावड़ा ने बताया कि इन दिनों गन्ने की फसल कल्ले निकलने और बढ़वार करने की स्थिति में है, ऐसे में आज कल की बारिश गन्ने की फसल के लिए अमृत के समान है। इससे गन्ने की फसल में कल्ले भी अधिक निकलेंगे और उसकी बढ़वार भी अच्छी होगी। जिसका किसानों को फायदा ही होगा।