करनाल। जिन्होंने देश की आजादी की खातिर अंग्रेजी हुकूमत के लठ खाए थे उन क्रांतिकारियों स्वतंत्रता सेनानियों के उत्तराधिकारियों को जिला प्रशासन भूल गया। स्वतंत्रता सेनानियों के उत्तराधिकारियों को इस बात का मलाल है कि स्वतंत्रता दिवस समारोह में उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया।
भले ही जिले में अब एक भी स्वतंत्रता सेनानी जीवित नहीं है, लेकिन पांच स्वतंत्रता सेनानियों की पत्नियां अभी जिंदा हैं। इनमें सुदेश रानी पत्नी स्वर्गीय देवेंद्र नाथ निवासी संत नगर कालोनी, इंद्र कौर पत्नी स्वर्गीय बलकार सिंह निवासी ब्रह्म नगर, बल्लो बाई पत्नी स्वर्गीय ज्ञान चंद निवासी रमेश नगर, हरनाम कौर पत्नी स्वर्गीय रतन सिंह निवासी रामनगर व कैलाश देवी पत्नी स्वर्गीय रामस्वरूप निवासी कुंजपुरा शामिल हैं। विदित हो कि जिले के अंतिम स्वतंत्रता सेनानी खुशी राम आर्य का एक मार्च 2020 को देहांत हो गया था।
स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी संगठन का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस समारोह में किसी उत्तराधिकारी को नहीं बुलाया गया है। स्वतंत्रता सेनानियों की विधवाओं को भी निमंत्रण नहीं भेजा गया, हालांकि इसके लिए कोरोना का हवाला दिया जा रहा है, जबकि फरीदाबाद प्रशासन ने घर-घर जाकर स्वतंत्रता सेनानियों व उत्तराधिकारियों को सम्मान दिया है। उन्होंने कहा कि वे पिछले दस वर्ष से उत्तराखंड की तर्ज पर हरियाणा में कुटुंब पेंशन की मांग कर रहे हैं, लेकिन यह मांग पूरी नहीं हुई। पंजाब में कुछ महीने पहले स्वतंत्रता सेनानी के परिवार को हर महीने 300 यूनिट बिजली फ्री देने की घोषणा की गई है, लेकिन अपेक्षाकृत हरियाणा में स्वतंत्रता सेनानियों और उनके उत्तराधिकारियों को सम्मान नहीं मिला।
संगठन के अध्यक्ष नरेंद्र सुखन ने कहा कि गांधी मेमोरियल हाल में स्वतंत्रता सेनानियों के नाम की सूची लगाने की मांग प्रशासन से की गई थी। कुछ महीने पहले उपायुक्त ने नगर निगम के मार्फत उनसे स्वतंत्रता सेनानियों की सूची मांगी थी। विवरण एकत्रित करने में समय लग गया। 15 दिन पहले 55 नामों की सूची नगर निगम को भेज दी थी। अब तक वह सूची भी नहीं लगाई गई।
वसंत विहार निवासी स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय खुशी राम आर्य के पुत्र जगमेंद्र सिंह का कहना है कि प्रशासन ने कोई निमंत्रण नहीं दिया। स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों को नजरंदाज किया जा रहा है। प्रदेश में स्वतंत्रता सेनानियों की पेंशन में भी बढ़ोतरी नहीं हुई। आयुष्मान योजना में जब स्वतंत्रता सेनानियों को शामिल किया गया, तब तक जिले में कोई स्वतंत्रता सेनानी नहीं बचा था।
203: स्वतंत्रता सेनानी स्व0 टीकाराम सुखन।