करनाल। सरकार का लक्ष्य 2025 तक टीबी को जड़ से खत्म करना है। इसी के मद्देनजर निक्षय पोषण योजना शुरू की गई है। योजना के तहत जो भी टीबी के मरीज को अस्पताल लेकर आएगा और उसका निक्षय पोर्टल पर पंजीकरण कराएगा उसे स्वास्थ्य विभाग की ओर से 500 रुपये दिए जाएंगे। इतना ही नहीं इस योजना के तहत टीबी के मरीज को भी पोषक आहार के लिए हर महीने जब तक वह टीबी की बीमारी से ठीक नहीं होता 500 रुपये उसके खाते में डाले जाएंगे। अब तक जिले में 2632 टीबी मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें से 1846 का इलाज चल रहा है। 2020 में 4004 और 2019 में 3738 टीबी मरीज सामने आए थे। संवाद
प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर भी उठा सकते हैं फायदा
टीबी के मरीज ढूंढने पर प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं। उसे भी सरकार की ओर से 500 रुपये दिए जा सकते हैं। यदि प्राइवेट अस्पताल का डॉक्टर टीबी के मरीज का निक्षय पोर्टल पर पंजीकरण कराते हैं तब। हालांकि बहुत कम प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर स्वास्थ्य विभाग को टीबी के मरीज की जानकारी देते हैं, क्योंकि वह खुद ही टीबी के मरीज का इलाज करते हैं।
निशुल्क मिलती हैं दवाइयां
जिसे टीबी के लक्षण हैं वह अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाकर बलगम की जांच करा सकता है। जांच में यदि टीबी की बीमारी आती है तो स्वास्थ्य विभाग की ओर से उस मरीज को निशुल्क दवाइयां दी जाती हैं साथ ही उसके टेस्ट भी निशुल्क किए जाते हैं। डॉक्टरों के अनुसार करीब 6 महीने तक टीबी के मरीज का इलाज चलता है।
टीबी के लक्षण
- दो सप्ताह से ज्यादा खांसी
- शाम के समय बुखार आना
- खांसते समय बलगम में खून आना
- छाती में दर्द होना या सांस फूलना
- गर्दन या बगल में गांठें
- भूख न लगना और वजन कम होना
नागरिक अस्पताल में हैं दस बेड का वार्ड
जिले में सभी सरकारी अस्पताल में टीबी की जांच होती है। यदि किसी मरीज की तबीयत ज्यादा खराब होती है तो टीबी के मरीजों के लिए नागरिक अस्पताल में दस बेड का वार्ड बनाया गया है। जहां पर उन मरीजों का इलाज किया जाता है।
यदि कोई टीबी के लक्षण वाले मरीज को स्वास्थ्य विभाग के पास लाता है और जांच में उसमें टीबी की बीमारी पाई जाती है तो उसको विभाग की ओर से 500 रुपये दिए जाते हैं। साथ ही टीबी के मरीज को भी हर महीने पोषण आहार के लिए 500 रुपये दिए जाते हैं। प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर भी इस योजना का लाभ ले सकता है। लोगों से अपील है कि जिन लोगों में टीबी के लक्षण हैं उन्हें नजदीक सरकारी अस्पताल में लाकर टीबी की जांच कराएं।
डॉ. सिम्मी कपूर, उप सिविल सर्जन करनाल