फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पड़ोसी, शिक्षक और रिश्तेदार ही कर रहे बच्चों का यौन शोषण, अभिभावक अनजान

विज्ञापन
विज्ञापन
कर्णनगरी में बच्चों के यौन शोषण के मामले बढ़ रहे हैं। पिछले दो साल में बाल कल्याण समिति के समक्ष 247 बच्चों के यौन शोषण के मामले सामने आए हैं। ऐसे मामलों की शिकायतों में आरोपी कोई और नहीं, बल्कि पड़ोसी, शिक्षक और रिश्तेदार ही पाए गए हैं। लंबे समय तक अभिभावक भी इससे अंजान रहे। उन्हें इसकी जानकारी तब हुई जब काफी देर हो चुकी थी। मनोचिकित्सक के अनुसार यदि आपके बच्चे को नींद नहीं आती है या फिर मानसिक और शारीरिक रूप से वह परेशान रहता है तो सावधान हो जाइए। ऐसे में वह यौन शोषण का शिकार हो सकता है।
विज्ञापन

बाल कल्याण समिति की सदस्य निरुपमा ने बताया कि दरअसल अभिभावक बच्चों को समय नहीं दे रहे हैं, जिसका खामियाजा बाद में सामने आ रहा है। अगर अभिभावक बच्चों का सही तरीके से ध्यान रखें और बच्चा नियमित रूप से उन्हें अपनी गतिविधियों और समस्याओं के बारे में बताया तो यौन शोषण के मामलों को कम किया जा सकता है। आवश्यकता है कि चार साल की उम्र से ही बच्चों को गुड-टच और बैड-टच के बारे में समझाना चाहिए। छोटे बच्चे हर चीज जल्दी सीखते हैं जो कि आगे के जीवन के लिए बहुत अनिवार्य है। उम्र के हर पड़ाव पर आने वाले बदलावों के बारे में माता-पिता को बताना चाहिए। बच्चा कहां और किसके साथ कितना समय देता है, इसकी जानकारी अभिभावकों को होनी चाहिए।
केस-1
एक महिला की आठ साल की बेटी को चलने में दिक्कत आ रही थी तो उसे डॉक्टर के पास लेकर गई। जांच करने के बाद पता चला कि बच्ची यौन शोषण का शिकार हुई है। महिला बच्ची को लेकर बाल कल्याण समिति गई तो काउंसलिंग के दौरान बच्ची ने बताया कि उसके पड़ोस का अंकल उसे हमेशा टॉफी देने के बहाने बुलाता है। महिला को करीब दो महीनों के बाद इस बात का पता चला था।
विज्ञापन

केस- 2
एक छह साल की बच्ची का उसके डांस टीचर के द्वारा ही यौन शोषण किया गया, जिसका पता बच्ची की मां को तीन महीनों के बाद चला। दो सप्ताह से बच्ची सहमी हुई थी और डांस क्लास जाने से मना कर रही थी। मां को कुछ न बताने पर महिला उसे बाल कल्याण समिति लेकर गई। काउंसलिंग के दौरान बच्ची ने बताया कि डांस टीचर उसे परेशान करता है और उसे दर्द भी होता है। समिति ने बच्ची की काउंसलिंग कर बच्ची के मन का डर निकाला और माता-पिता ने डांस टीचर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
केस-3
मां ने बच्ची के शरीर पर चोट के निशान देखकर उससे सवाल किया। कुछ न बताने पर माता-पिता घबरा कर पुलिस के पास गए। पुलिस के कहने पर माता-पिता बच्ची को बाल कल्याण समिति ले गए। वहां काउंसलिंग के बाद बच्ची ने इस बात का खुलासा किया कि मम्मी-पापा के ऑफिस जाने के बाद अंकल घर पर आता है जो कि रिश्तेदार है। उसकी उम्र करीब 60 साल थी। वह लड़की का यौन शोषण करता और धमकाता था।
केस-4
एक महिला अपनी बेटियों के साथ किसी के घर पर काम करने जाती थी। इस दौरान बेटियां डरी और सहमी रहती थीं। कई दिनों तक ऐसा होता रहा। आखिर में महिला ने किसी के बताने पर बाल कल्याण समिति में बच्चों की काउंसलिंग करवाई। वहां बच्ची ने खुलासा किया कि उसके साथ घर में मालिक द्वारा छेड़छाड़ किया जाता है। इसके बाद महिला की ओर से मालिक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई।
है।
बच्चों की सुरक्षा के लिए अभिभावक खुद सतर्क हों और बच्चों को भी जागरूक करें। उन्हें सही-गलत और गुड टच-बैड टच के बारे में समझाएं। रोजाना बच्चों को समय दें। बच्चा किस समय कहां खेल रहा है, किसके साथ है और रोजाना कहां जाता है। इस बात का भी ध्यान रखें। जागरूकता से ही यौन शोषण पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
- उमेश चानना, चेयरमैन, बाल कल्याण समिति
जब भी बच्चे ऐसी स्थिति से गुजरते हैं तो उन पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ते हैं। उन्हें नींद न आना, तनाव, लोगों से डरना, बिस्तर गीला करना और अन्य कई शारीरिक और मानसिक समस्याएं हो जाती हैं। ऐसे में अभिभावकों को ज्यादा से ज्यादा समय उनके साथ बिताना चाहिए ताकि इस तनाव से बाहर आ सकें।
विज्ञापन

- डॉ. मनीष बठला, मनोचिकित्सक
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें