Three patients on one bed, mothers sit on the floor with the baby in their lap
- फोटो : Kaithal
जिला अस्पताल में जिन नवजात शिशुओं की अभी ठीक से आंख तक नहीं खुली, माताएं उन्हें गोद में लेकर फर्श पर बैठने को मजबूर हैं । ऐसा इसलिए क्योंकि जिला अस्पताल के जच्चा-बच्चा वार्ड में बेड की कमी है। एक बेड पर तीन से चार माताओं को नवजात शिशुओं के साथ रखा जा रहा है। हालांकि अस्पताल में रोजाना दाखिल होने वाले मरीजों की संख्या को देखते हुए यहां शुरुआत से ही बेडों की समस्या बनी रही है, लेकिन महामारी के दौरान स्थिति और ज्यादा खराब हो गई है।
बेडों की संख्या कम होने के कारण सबसे ज्यादा दिक्कत गर्भवती महिलाओं को या फिर उन महिलाओं को हो रही है, जिनका प्रसव हो चुका है। एक कमरे में आठ बेड की व्यवस्था है, लेकिन मरीज कहीं ज्यादा भर्ती किए जा रहे हैं। जिससे अधिकतर महिलाओं को अपने नवजात शिशुओं को लेकर बरामदे में जमीन पर बैठना पड़ रहा है। वहीं सामाजिक दूरी का भी कोई ध्यान नहीं रखा जा रहा है।
Three patients on one bed, mothers sit on the floor with the baby in their lap- फोटो : Kaithal