साहित्य सभा की मासिक गोष्ठी आरकेएसडी कॉलेज के अध्यापक कक्ष में हुई। इसकी अध्यक्षता सभा के प्रधान प्रो. अमृत लाल मदान ने की। गोष्ठी का संचालन डॉ. प्रद्युमन भल्ला ने किया।
दिनेश बंसल ने अपनी गजल के एक शेर में कहा कि उसकी रहमत के समंदर का कोई छोर नहीं, नेक नीयत हो तो, हर चीज खुदा देता है। रविंद्र रवि ने कहा मेरी गलतियां मुझको गिनवा रहा है, तू समझा रहा है या धमका रहा है। डॉ. प्रद्युमन भल्ला ने कहा जो जले दीप बन रोशनी के लिए, माफ करते रहे आंधियों की खता। इश्क जिनका रहा इश्क के वास्ते, कब जमाने को उनसे रहा वास्ता। कोरोना के कारण हुई मौतों के लिए कहीं न कहीं हम सब जिम्मेदार हैं। यह बात नीरू मेहता ने इन पंक्तियों में कही-कोरोना से हुई मौतों में, हम सब लोग शामिल हैं। बेशक न कबूलें लेकिन, थोड़े-थोड़े सब कातिल हैं। लहना सिंह अत्री कहते हैं धरती और आकाश गूंजता चाल्या आवै पुष्प विमान। धर्म युधिष्ठिर जल्दी चाल्लो, जहां पर तेरा उचित स्थान।
डॉ. तेजिंद्र ने कहा बहुत कुछ याद रहता है, बहुत कुछ भूल जाते हैं। यादों के, भुलावों के, झूले झूल जाते हैं। प्रो. अमृत लाल मदान ने कहा चल मेरी तूली रंग जमा दे, फिर से नव आशाओं के। डॉ. हरीश झंडई का कहना है नदियां के पानी की धार बदल जाती है। बदलते मौसम में, जिदंगी बदल जाती है। रिसाल जांगड़ा ने कहा किसनै किसी लगाई आग। कोन्या बुझै बुझाई आग। उसके भीतर भरया फितूर, जिसनै सै भडक़ाई आग। सतीश शर्मा ने कहा यूं तो किसी भी रिश्ते का, महत्व कम नहीं होता। पर दुनिया के कोई रिश्ता, मां के रिश्ते से कम नहीं होता। सतपाल शास्त्री पराशर ने कहा उठ, उठावण आले का न इस तरियां इंतजार करै। कर्म बीर माणस वो सै जो मैदानां म्हं हुंकार भरै। मधु गोयल ने कहा आया-आया नवरात्र का त्योहार रे। माता रानी का सजा दरबार रे। कमलेश शर्मा ने कहा धूल आकाश में, धुंधला गया है सूरज। तप गई है धरती। ऐसे में लक्ष्य हीन पथिक, सिर झुकाये, आंखें मूंदे चल रहा है। गोष्ठी के दौरान लहना सिंह अत्री के हरियाणवी महाकाव्य महाभारत का सार का लोकार्पण भी किया गया। गोष्ठी में श्याम सुंदर गौड़, मिट्ठू राम, राजेश भारती, अनिल कौशिक, डॉ. चतरभुज बंसल सौथा व डॉ. प्रीतम लाल शर्मा ने भी अपनी रचनाएं सुनाई।