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गेहूं का भुगतान नहीं होने के विरोध में आढ़तियों ने की एफसीआई के खिलाफ नारेबाजी

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ढांड। गेहूं खरीद का भुगतान नहीं होने के विरोध में अनाज मंडी ढांड के आढ़तियों ने एफसीआई के खिलाफ नारेबाजी कर रोष प्रकट किया। विस्तार अनाज में मंडी प्रधान रमेश कुमार की दुकान पर आढ़तियों की बैठक हुई। इसमें गेहूं का भुगतान नहीं किए जाने पर एफसीआई की कड़ी आलोचना की गई।
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प्रधान ने कहा कि 18 दिन बीत जाने के बावजूद किसानों के खाते खाली पड़े हैं। सरकार कहती है कि गेहूं खरीद के बाद 72 घंटे में किसानों के खाते में पेमेंट डाल दी जाएगी, लेकिन वास्तविकता यह है कि चंद किसानों को छोड़कर ज्यादातर किसानों के खातों में एक फूटी कौड़ी भी नहीं आई है। किसान प्रतिदिन सुबह आकर दुकान पर बैठ जाते है और अपनी गेहूं की पेमेंट के बारे में दिनभर पूछते रहते हैं कि कब पेमेंट आएगी, लेकिन उनके सवाल का कोई जवाब नहीं होता।
मंडी ऐसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल जब भी एफसीआई कार्यालय में जाकर पेमेंट के बारे में पूछता है तो उनका एक ही जवाब होता है कि दो-तीन दिन इंतजार करें, पेमेंट हो जाएगी। ऐसा सुनते-सुनते 18 दिन बीत चुके हैं। मंडी प्रधान का कहना है कि गेहूं के भुगतान में हो रही देरी के कारण किसान व आढ़ती दोनों परेशान हैं। ऐसा पहली बार हुआ है जब किसानों को उनकी फसल का भुगतान करने में 18-18 दिन बीत गए हो।
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बैठक में समस्त आढ़तियों ने एफसीआई का बहिष्कार करने का फैसला लिया है। ढांड को छोड़कर अन्य मंडियों में खरीद एजेंसियों की ओर से फसल का भुगतान साथ के साथ किया जा रहा है। एफसीआई की ओर से ढांड मंडी के आढ़तियों व किसानों को पेमेंट के नाम पर गुमराह किया जा रहा है। यह एफसीआई की एक सोची समझी चाल है। आढ़तियों ने कहा कि भविष्य में एफसीआई को एक भी दाना नहीं देंगे। चाहे इसके लिए उन्हें कुछ भी करना पड़े पीछे नहीं हटेंगे।
इस बारे में कुरुक्षेत्र स्थित एफसीआई के डीएम मंजूनाथ नेे कहा कि सोलू माजरा साइलोज में एफसीआई लगभग 93 करोड़ रुपये की गेहूं खरीद चुकी है। शुक्रवार तक 60 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। पेमेंट के लिए अतिरिक्त स्टाफ को लगाया हुआ है। बुधवार तक 90 प्रतिशत भुगतान कर दिया जाएगा।
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