दीपों का त्योहार दीपोत्सव भैया दूज छह नवंबर तक मनाया जाएगा। इसका प्रमुख त्योहार दिवाली आज चार नवंबर और गोवर्धन पूजा पांच नवंबर की है। ज्योतिषों के अनुसार दिवाली पर ग्रह, नक्षत्र व योगों का विशिष्ट संयोग 30 साल बाद बन रहा है।
पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि दिवाली वीरवार के दिन चित्रा नक्षत्र में आरंभ होगी और स्वाति नक्षत्र योग में मनाई जाएगी। दिवाली पर ग्रह, नक्षत्र व योगों का विशेष अनुक्रम बन रहा है। इसमें सूर्य, मंगल व चंद्र की युति विशेष लाभ देने वाली रहेगी। यही नहीं केंद्र में शुभ ग्रहों का योग भी सहयोगात्मक रहेगा। दीपों के त्योहार की शुरुआत धनतेरस से होती है, जो दिवाली से दो दिन पहले कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है। दिवाली पर शुभ ग्रहों का योग भी सहयोगात्मक रहेगा।
पंडित प्रेम शंकर शास्त्री ने बताया कि दीपावली पर मां लक्ष्मी की पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है। दीपावली का पर्व विक्रम संवत कैलेंडर के अनुसार कार्तिक मास के पहले दिन अमावस्या को मनाया जाता है। लक्ष्मी पूजा भी दिवाली उत्सव का एक हिस्सा होता है। दिवाली पूजा या लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 9 मिनट से 8 बजकर 4 मिनट तक है।
दिवाली के दौरान लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा की पूजा की जाती है। लक्ष्मी को धन/संपत्ति की देवी माना जाता है। वहीं भगवान गणेश बुद्धि और कार्य को सफल करने वाले देवता माने जाते हैं। लक्ष्मी पूजा में मीठे का भोग जैसे खीर, मिठाई, हलवा व मोदक का भोग लगाया जाता है।
दीपावली के मौके पर बहुत से लोग व्रत भी रखते हैं और देवी-देवताओं के साथ अपने पूर्वजों के नाम का दीपक भी जलाते हैं।
ये है विधि-पूजा स्थल में चावल या गेहूं की एक छोटी ढेरी बनाकर उस पर देसी घी का एक दिया जलाएं माता लक्ष्मी का पाठ करें। मां लक्ष्मी सहित सभी देवी देवताओं को भोग लगाएं।
इस समय करें लक्ष्मी पूजन-वृष लग्न शुक्र से लक्ष्मी पूजन मुहूर्त
शाम 06.09 बजे से रात 08.04 बजे तक।
प्रदोष काल में पूजन का समय शाम 05.32 बजे से रात 08.12 बजे तक रहेगा।
व्यापारिक पूजन के लिए धनु लग्न में प्रात 9.51 से 11.50 बजे तक रहेगा।
मध्याह्न 11.10 बजे से 01.30 बजे तक शुभ मुहूर्त हैं।
इस दिन दोपहर 13.30 बजे से 03.00 बजे तक राहुकाल का समय त्यागने योग्य है।
मीन लग्न में दोपहर 03.01 बजे से 04.26 बजे तक।
मेष लग्न में शाम 04.27 बजे से 06. 06 बजे तक।