राजौंद। जींद रोड पर स्थित नहर किनारे तर्पण कार्यक्रम हुआ। इस दौरान आचार्य जीवन प्रकाश हरित और आचार्य पंडित राम भगत हरित ने कहा कि नगर के श्रावणी पर्व मनुष्य को देव, ऋषि और पितृ दोष से मुक्ति दिलाता है।
बताया कि इस बार भद्रा के कारण यह कार्यक्रम भद्रा से पहला किया, क्योंकि भद्रा में ये दो कार्य नहीं किए जा सकते। इस आयोजन को पिछले लगभग 68 वर्षों से प्रतिवर्ष आयोजित कर रहे हैं। तर्पण के बाद विधिपूर्वक सप्तऋषि पूजा, यज्ञोपवीत पूजा और हवन किया। इसमें सभी ने पूर्ण आहुति डालकर पुण्य कमाया।
आचार्यों ने बताया कि यज्ञोपवीत धारण करने वाले व्यक्ति को यज्ञ में आहुति धर्म-कर्म अनुष्ठान करने का अधिकार प्राप्त होता है।
इस मौके सतबीर भार्गव, जीवन शास्त्री आचार्य, स आचार्य राम भगत हरित, आचार्य हर्ष, ज्योतिषाचार्य आशुतोष हरित, पंडित राजेंद्र शर्मा, संजीव हरित खुरड़ा, संजय, सतीश कौशल, अनिरुद्ध हरित और दुर्गा दत्त शर्मा आदि ने पूजन में भाग लिया।
गौरतलब है कि श्रावणी उपाकर्म ब्राह्मणों का मुख्य पर्व है। श्रावण माह की पूर्णिमा पर इस पर्व पर नक्षत्रों की पूजा की जाती है। यह पूजन कार्य रक्षाबंधन से पूर्व किया जाता है। सुबह ही ब्राह्मण समुदाय के लोग इकट्ठा होकर विभिन्न घाटों पर एकत्रित होते हं। इसके बाद वे स्नान आदि करते हैं। इसके बाद ऋषि, देव और पितृ तर्पण करते हैं।