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कॉलोनियों में सीवरेज ठप, गलियों में भरा पानी, सर्दी से ठिठुरे लोग

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Sewerage stalled in colonies, water filled in streets, people chilled by winter - फोटो : Kaithal
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कैथल। पिछले चार दिनों से रिमझिम तो कभी तेज हो रही बारिश ने लोगों की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। गेहूं की फसल को छोड़कर हरी सब्जियां नष्ट होने का खतरा मंडराने लगा है। शनिवार और रविवार को जिले में 35 एमएम बारिश दर्ज की गई। हालात यह बने कि कई कॉलोनियों में सीवरेज व्यवस्था ठप हो गई तो वहीं निचली गलियों में जलभराव हो गया। बारिश से सर्दी बढ़ गई है।
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शहर में शनिवार व रविवार की रात को भी तेज बारिश हुई। रविवार को दोपहर बाद तक हल्की बूंदाबांदी जारी रही। इस दौरान औसतन 35 एमएम पानी बरसा। बारिश ने एक बार फिर शहर की सीवरेज व्यवस्था ठप कर दी और शहर के सभी मुख्य मार्गों, कॉलोनियों में जलभराव लोगों के लिए आफत बना। रविवार को दिनभर रुक-रुककर बूंदाबांदी हुई। बारिश से शहर वासी जहां परेशान रहे, वहीं फसलों की डाली में जान आ गई है, जिससे किसानों के चेहरों पर मुस्कान है। वहीं कृषि विभाग के अनुसार जहां पर बारिश से पहले पानी दिया गया था, वहीं पर थोड़ा बहुत नुकसान की संभावना हो सकती है। कहीं पर भी ज्यादा नुकसान नहीं है। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिन तक मौसम इसी प्रकार से रह सकता है।
आपदा एवं प्रबंधन विभाग के सदर कानूनगो पूर्ण चंद ने बताया कि शनिवार को सबसे अधिक बरसात कैथल में हुई। इसके बाद गुहला-चीका, सीवन, कलायत, राजौंद, पूंडरी में 27 और ढांड में भी जमकर मेघ बरसे। बारिश से लोग दिनभर परेशान रहे। शहर के करनाल रोड, अंबाला रोड, ढांड रोड, रेलवे अंडर ब्रिज, जींद रोड स्थित कई जगहों पर जलभराव हुआ।
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दूसरी सिंचाई की नहीं जरूरत, किसानों की बचेंगे लाखों रुपये
किसान केशा राम, प्रदीप चहल, राजेश कुमार ने बताया कि बारिश खेतों में सरसों और गेहूं की फसल के लिए संजीवनी बूटी बनी। शनिवार की सुबह हुई बारिश जहां राहत लाई थी, वहीं शाम को हुई बारिश ने तो फसलों में नई जान डाल दी है। गेहूं में तीन बार पानी दिया जाता है। पहला पानी दिसंबर में, दूसरा पानी जनवरी अंतिम सप्ताह या फरवरी के पहले सप्ताह में और तीसरा पानी मार्च माह में दिया जाता है। बारिश के बाद अब किसानों को दूसरा पानी देने की जरूरत नहीं है। दूसरे पानी की पूरी आपूर्ति हो चुकी है, जिससे किसानों के लाखों रुपये डीजल के रूप में बचेंगे।
कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य समन्वयक डॉ. रमेश चंद्र वर्मा ने बताया कि शनिवार शाम को हुई बारिश से अभी तक गेहूं की फसल को कोई नुकसान नहीं है। जबकि कुछ जगहों पर सरसों की फसल व कई जगहों पर सब्जियों को नुकसान की संभावना है। 10 जनवरी तक मौसम में बदलाव रहेगा। रविवार को भी बूंदाबांदी हुई। अधिकतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 6 डिग्री दर्ज किया गया।
बारिश के बाद गलियों में हुआ कीचड़, कॉलोनीवासी परेशानी
सीवन। पिछले कई दिनों से पड़ रही बारिश से नगर में कई गलियों में कीचड़ भर गया है। सीवरेज के कारण जिन गलियों को खोदा गया और बाद में सही नहीं किया गया, उन गलियों का बहुत बुरा हाल है। वहां से निकलना भी कठिन हो गया है। इसके साथ ही सीवरेज के कारण जिन गलियों में खुदाई हुई थी, उन जगहों पर बारिश का पानी भरने से गड्ढे बन गए हैं। इन गड्ढों में वाहनों के फंसने का खतरा बना रहता है। पहले भी नगर में कई स्थानों पर इस प्रकार के बने गड्ढों में कई वाहन फंस चुके हैं। जन स्वास्थ्य विभाग बार-बार इन गड्ढों में मिट्टी डालकर उन्हें भरकर अपनी ड्यूटी पूरी करता है, परंतु फिर से गड्ढे बनने से नगर वासियों की परेशानी बढ़ रही है। नगर वासियों का कहना है कि सीवरेज के ठेकेदार ने इस सीवरेज के काम में धांधली की है। सीवरेज व्यवस्था के सही प्रकार से न होने के कारण है। सीवरेज व्यवस्था की खुदाई के स्थानों को सही करवाया जाए और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
बारिश में गिरी मकान की छत
कैथल। पिछले तीन दिन से हो रही बारिश ने हरिजन बस्ती पाड़ला में एक गरीब के सिर से छत छीन ली। हरिजन बस्ती निवासी सुमन व उसका पति सलिंद्र अपने घर में बच्चों सहित बैठे थे। दोपहर को अचानक मकान की छत से मलबा गिरने लगा। मलबा गिरते देख पति-पत्नी ने अपने बच्चों को बाहर निकाला। जैसे ही वे बाहर निकल रहे थे तो अचानक से धीरे-धीरे सारी छत गिर गई। इससे परिवार बाल बाल बच गया। घर के अंदर रखा सारा सामान भी मलबे के नीचे गिर गया। इसके बाद सूचना पाकर शिव कुमार पाराशर, सरपंच देव राणा ने उनका घर का सामान बाहर निकलवाया।
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